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ये 3 ‘T’ हैं पीएम मोदी के पास, यही उनको बनाते हैं नेताओं में सबसे खास

21 जून को 168 वर्ष पुरानी ब्रिटिश हेराल्ड नामक मैगज़ीन की ओर से कराए गए ऑनलाइन सर्वेक्षण में नरेन्द्र मोदी को विश्व का सबसे शक्तिशाली नेता घोषित किया गया. दुनिया के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति के चयन की इस प्रतिस्पर्धा में विश्व की दो सबसे बड़ी महाशक्तियाँ अर्थात् अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी थे. तो पहले दक्षिण एशिया, फिर एशिया और उसके बाद पूरी दुनिया में तीसरी शक्ति के रूप में उभरने की कोशिश और कवायद में जुटे चीन के चिरायु राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी थे. लेकिन इन सभी धुरंधरों को धराशायी करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विश्व के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति चुने गए.

इस रीडर्स पोल में नरेन्द्र मोदी 30.9 प्रतिशत वोट पाकर प्रथम स्थान पर रहे, जबकि मोदी के निकटतम् प्रतिद्वंद्वी पुतिन रहे, जिन्हें 29.9 प्रतिशत वोट हासिल हुए. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प को मात्र 21.9 प्रतिशत और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग को महज 18.1 प्रतिशत वोट मिले. मैगज़ीन में प्रकाशित लेख के अनुसार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को उनकी आतंकवाद विरोधी कड़ी छवि के लिए अधिक रेटिंग मिली. लोगों को पुलवामा आतंकी हमले के बाद की गई एयर स्ट्राइक ने ही नहीं, अपितु मोदी के कुशल प्रशासक होने के गुण ने भी आकर्षित किया. लोगों को मोदी सरकार के आयुष्मान भारत, उज्ज्वला और स्वच्छ भारत अभियान जैसे कार्यक्रम भाए और लोगों ने मोदी में एक कुशल नेतृत्वकर्ता देखते हुए उन्हें वोट दिया.

अब सवाल यह उठता है कि क्या सिर्फ एक स्ट्राइक किसी व्यक्ति को विश्व का शक्तिशाली व्यक्ति बना सकती है ? उत्तर कदाचित नहीं ही होगा. वास्तव में मोदी यदि आज विश्व के शिखर पर पहुँचे हैं, तो उसके पीछे उनकी आंतरिक ऊर्जा, उनकी विशाल विचारधारा और प्रखर-प्रचंड मनोबल जैसे गुणों का बड़ा योगदान है.

प्रधानमंत्री मोदी को जो 3T भारत सहित पूरी दुनिया के नेताओं से अलग बनाते हैं, उनमें त्याग, तप-तपस्या और तन्मयता शामिल हैं. जहां सभी राजनीतिक दलों के नेता राजनीति करते हैं और साथ में परिवार चलाते-चलाते परिवारवाद तक चलाने की कोशिश कर लेते हैं, तो दूसरी ओर प्रधानमंत्री के निजी परिवार में माँ, भाई, भाभी, बहन सहित कई संबंधी हैं, परंतु कोई भी मोदी का निकटस्थ नहीं है, जो मोदी के त्याग को दर्शाता है. पीएम ने संघ में रह कर, भाजपा संगठन में रह कर, गुजरात का मुख्यमंत्री बन कर और देश का प्रधानमंत्री बन कर भी सिर्फ उसी जनता को परिवार माना, जिसने उन्हें प्रेम से आशीर्वाद दिया. मोदी ने उस जनता में अपने व्यक्तिगत परिवार को भी शामिल मान लिया.

यही कारण है कि मोदी का जीवन संन्यासी सम्राट, फ़कीर बादशाह से कम नहीं है. बचपन से बगल में झोला लटकाए घूमने वाले मोदी के पास आज भी कोई सामान नहीं है. तो कुल मिला कर त्याग मोदी की नस-नस में समाया है, तो निरंतर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना मोदी का तप और तपस्या है और कर्तव्यों में तन्मयता उनका तीसरा गुण है, जो उन्हें देश और दुनिया के सभी नेताओं से अलग दर्शाता है.

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