ख़बरसेहत

‘चमकी’ की चमक में हमेशा के लिए खो गए 84 मासूम, क्या है ये जानलेवा बुखार

बिहार के मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार से मरने वाले बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है. इलाके में महामारी का रूप ले चुके इस बुखार के चलते शनिवार रात तक 80 बच्चों के मरने की खबर थी, लेकिन रविवार सुबह 4 और बच्चों ने दम तोड़ दिया. अब तक 84 बच्चों की मौतें इस बुखार के चलते हुई हैं. रविवार को 4 बच्चों की मौत तो उस वक्त हुई, जब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन हालात का जायजा लेने के लिए पहुंचे हुए थे.

हिंदी में चमकी बुखार कह लीजिए या फिर अंग्रेजी में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम. दोनों का एक ही मतलब है, मौत. ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि बिहार में इन दिनों ये चमकी बुखार कहर बरपा रहा है. रोज बच्चों के मरने की खबरें आ रही हैं. सिर्फ 10 जून के आंकड़ों के मुताबिक एक दिन में मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच अस्पताल में 44 बच्चे भर्ती किए गए. जिनमें से 25 बच्चों की मौत हो गई. डॉक्टरों के मुताबिक इस बुखार से पीड़ित और मरने वाले सभी बच्चों की उम्र 5 से 10 साल के बीच की है.

चमकी बुखार में बच्चे को लगातार तेज़ बुखार चढ़ा ही रहता है. बदन में ऐंठन होती है. बच्चे दांत पर दांत चढ़ाए रहते हैं. कमज़ोरी की वजह से बच्चा बार-बार बेहोश होता है. यहां तक कि शरीर भी सुन्न हो जाता है. कई मौकों पर ऐसा भी होता है कि अगर बच्चों को चिकोटी काटेंगे तो उसे पता भी नहीं चलेगा. जबकि आम बुखार में ऐसा नहीं होता है.

डॉक्टरों की मानें तो गर्मी और चमकी बुखार का सीधा कनेक्शन होता है. पुरानें कुछ सालों के पन्नों को पलट कर देखें, तो इससे ये साफ हो जाता है कि दिमागी बुखार से जितने बच्चे मरे हैं, वो सभी मई, जून और जुलाई के महीने में ही मरे हैं. लेकिन और ज्यादा गहराई से देखेंगे तो पता चलेगा कि मरनेवालों में ज्यादातर निम्न आय वर्ग के परिवार के ही बच्चे थे. आसान शब्दों में कहें तो जो बच्चे भरी दोपहरी में नंग-धड़ंग गांव के खेत खलिहान में खेलने निकल जाते हैं. जो पानी कम पीते हैं. तो सूर्य की गर्मी सीधा उनके शरीर को हिट करती है. तो वे दिमागी बुखार के गिरफ्त में पड़ जाते हैं.

मस्‍तिष्‍क ज्‍वर (चमकी बुखार, दिमागी बुखार, जापानी इंसेफलाइटिस, नवकी बीमारी) एक गंभीर बीमारी है. इसका समय रहते इलाज होना चाहिए. यह बीमारी अत्‍यधिक गर्मी एवं नमी के मौसम में फैलता है. 1 से 15 साल की उम्र के बच्‍चे इस बीमारी से ज्‍यादा प्रभावित होते हैं.

 

Back to top button