खेल

अगर बीच में न आए होते अरुण जेटली, तो सहवाग छोड़ देते दिल्ली

पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता अरुण जेटली के निधन की खबर से पूरे देश में शोक की लहर है. राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में सक्रिय होने के साथ-साथ जेटली का खेल जगत में भी उल्लेखनीय योगदान रहा. ऐसे में क्रिकेट जगत में भी काफी दुख देखा जा रहा है.

अरुण जेटली का क्रिकेट से काफी पुराना नाता रहा है. वह दिल्ली एंड डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन (DDCA) के अध्यक्ष भी रहे और वीरेंद्र सहवाग जैसे कई क्रिकेटरों के करियर को संवारने में उनका भी बड़ा हाथ रहा है. सहवाग और जेटली के बीच हमेशा ही अच्छे रिश्ते रहे. लेकिन, एक समय ऐसा भी आया था कि जब डीडीसीए और सहवाग के बीच मनमुटाव हो गया था और फिर दूरियां इतनी अधिक बढ़ गई थी कि सहवाग ने दिल्ली छोड़कर हरियाणा जाने की योजना बना ली ‌थी. वह हरियाणा से खेलने की तैयारी करने लगे थे. सभी औपचारिकताएं भी पूरी हो गई थीं.

जैसे ही यह बात अरुण जेटली को पता चली तो उन्होंने खुद सहवाग से बात की और उन्हें दिल्ली छोड़कर जाने से रोकने की कोशिश की. काफी बातचीत और समझाने के बाद वीरेंद्र सहवाग ने अरुण जेटली की बात मान ली और दिल्ली काे छोड़कर नहीं गए. आज जेटली के निधन पर उनको श्रद्धांजलि देते हुए सहवाग ने ट्वीट के जरिए वो पूरा किस्सा बयां किया.

वीरेंद्र सहवाग ने ट्वीट कर कहा, ‘अरुण जेटली जी के निधन से काफी दुख है. सामाजिक जीवन में बड़ी सेवाएं देने के अलावा उन्होंने दिल्ली के कई क्रिकेटरों को भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करवाने में भी अहम भूमिका निभाई.’

सहवाग ने आगे कहा, ‘ एक ऐसा वक्त भी था जब दिल्ली से बहुत कम खिलाड़ियों को राष्ट्रीय टीम में खेलने का मौका मिलता था. लेकिन डीडीसीए में उनके नेतृत्व में मुझ समेत कई खिलाड़ियों को भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला. उन्होंने खिलाड़ियों की समस्याओं को सुना. वह समस्याओं का हल करने वाले इंसान थे. मेरा निजी रूप से उनसे काफी अच्छा रिश्ता था. उनके परिवार को करीबियों के लिए मैं दिल से संवेदनाएं प्रकट करता हूं. ओम शांति.’

 

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