उत्तर प्रदेश

उन्नाव रेप कांड : अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग, 5 दिन बाद भी पीड़िता को नहीं आया होश 

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लखनऊ । रायबरेली में सड़क हादसे में घायल उन्नाव रेप पीडि़ता को 5वें दिन भी होश नहीं आया है। जिसको लेकर डॉक्टर चिंतित हैं। वहीं पीडि़ता के वकील की भी हालत गंभीर बनी हुुई है। पीडि़ता वेंटिलेटर पर जिंदगी के लिए लड़ रही है। पीडि़ता की सेहत में आज भी कुछ खास सुधार नहीं हुआ। हालत नाजुक बनी हुई है। 10 घंटे ऑक्सीजन के सहारे रखने के बाद उन्हें कुछ देर के लिए वेंटिलेटर पर रखा गया। बता दें कि ट्रॉमा सेंटर के तीसरे तल पर स्थित टीवीयू में रेप पीडि़ता व वकील भतीज़् हैं। प्रवक्ता डॉ. संदीप तिवारी ने बताया कि पीडि़ता की हालत गंभीर बनी हुई है। सीटी स्कैन रिपोटज़् लगभग सामान्य है।

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खून से जुड़ी कुछ जांचें कराई गईं हैं। उन्होंने बताया डॉक्टरों की टीम दोनों मरीजों की निगरानी में जुटी है। वकील की सेहत में कुछ सुधार हुआ है। अब तक उन्हें कई बार वेंटिलेटर से हटाया गया। ऑक्सीजन के सहारे रखा गया। उन्होंने बताया कि एकदम से काफी देर के लिए किसी भी मरीज को वेंटिलेटर से नहीं हटाया जा सकता है। बीच-बीच में मरीज को वेंटिलेटर पर रखा गया है, ताकि कमजोर अंगों को सहारा दिया जा सके।

पीडि़ता को एम्स में किया जा सकता है एयरलिफ्ट

सीजेआई रंजन गोगोई ने इसके साथ ही लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों से पूछा कि क्या पीडि़ता को एयरलिफ्ट किया जा सकता है कोर्ट ने कहा कि अगर परिवार चाहे तो पीडि़ता को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली लाया जा सकता है। डॉक्टरों की रिपोर्ट के मुताबिक लखनऊ अस्पताल के पास इलाज की सुविधाएं हैं, हालांकि पीडि़ता दिल्ली शिफ्ट करने की हालत में है। पीडि़ता के साथ-साथ घायल वकीलों के बारे में भी ऐसा ही करने को कहा गया है। बता दें कि पीडि़ता को दिल्ली एयरलिफ्ट किया जाए या नहीं इस पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा।

अब सीआरपीएफ करेगी पीडि़ता और उसके परिवार की सुरक्षा

इसके अलावा चीफ जस्टिस ने ये भी पूछा है कि क्या पीडि़ता के परिवार को सुरक्षा चाहिए। जिस पर वकील ने  अदालत को बताया कि पीडि़ता की चार बहनें हैं माता हैं और एक चाचा हैं जिनकी पत्नी की एक्सीडेंट में मौत हो चुकी है। इन सभी को सुरक्षा मुहैया कराई जानी चाहिए। इस पर कोर्ट ने कहा कि पीडि़ता, उसके वकील, मां, चारों बहनों और चाचा को तुरंत प्रोटेक्शन दिया जाए। साथ ही सीआरपीएफ के जवान पीडि़ता और उसके परिवार को सुरक्षा देंगे। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को 7 दिन के भीतर दुर्घटना मामले की जांच पूरी करने के निर्देश दिए है।

 ट्रामा से मीडिया का कैमरा हटाने को लेकर सीएमएस ने काटा हंगामा

राजधानी के केजीएमयू ट्रामा सेंटर पर पीडि़त महिला और वकील के मामले पर अस्पताल प्रशासन से जानकारी मांगने पर ट्रामा के सीएमएस यू.बी. मिश्रा ने मीडिया कर्मियों से अभद्रता की। साथ ही उन्होंने ट्रामा के सामने से न्यूज चैनलों के कैमरा हटाने की बात कर रहे हैं, जहां एक तरफ  उन्नाव मामले पर कुलदीप सिंह सेंगर सवालों के घेरों में है वहीं ट्रामा के सीएमएस बताने वाले यू.बी. मिश्रा जिस तरह से मीडिया कर्मियों को वहां से जाने की बात कर रहे हैं वो संदेह के घेरे में है।

बता दें कि ट्रामा सेंटर में मीडिया के साथ अभद्रता करने वाले खुद को केजीएमसी का अधिकारी यू.बी. मिश्रा संदिग्ध परिस्थितियों को लेकर अभद्रता की और केजीएमसी से न्यूज चैनलों के कैमरे हटाने को लेकर हंगामा काटा। साथ ही कुलदीप सिंह सेंगर के पक्ष की कर रहे हैं बात और अस्पताल प्रशासन पूरे मामले में खामोश है। केजीएमयू के गेट के बाहर कैमरा हटाने को लेकर हंगामा काटा। देखने वाली बात यह है कि जिस तरह से उन्होंने ट्रामा सेंटर के अंदर अपनी निजी कार को गेट के सामने खड़ी कर रहे हैं जिससे वहां आने जाने वाले मरीजों को तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है।
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