राजनीति

अब लोगों ने ग़लत को ग़लत कहना छोड़ दिया है, क्योंकि उनसे सवाल पूछना खराब लगता है, जिन पर भरोसा किया था

उन्नाव में एक लड़की का रेप होता है. आरोपी एक विधायक. बीजेपी का. कुलदीप सिंह सेंगर. लड़की मुख्यमंत्री आवास पर खुद को जलाने की कोशिश करती है, तब पुलिस की कार्रवाई होती है. लड़की के पिता की मौत हो जाती है. पुलिस हिरासत में. ख़बरें आईं उसे विधायक के भाई ने पीटा था.

पिता के मौत के चश्मदीद की गवाह की मौत हो जाती है. मरने वाले का नाम यूनुस. घर वाले इतना घबराए होते हैं कि बिना पोस्टमार्टम बॉडी दफना देते हैं. लड़की सीबीआई से कुछ दिन पहले कहती है. उस पर हमला हो सकता है.

हादसा होता है. एक ट्रक उनकी कार से भिड़ जाती है. लड़की की मौसी और चाची मर जाती हैं. लड़की और उसके वकील इमरजेंसी की हालत में हैं.लड़की के लिए अस्पताल वालों ने हाथ खड़े कर दिए हैं कह दिया है कि इसे कहीं और भी ले जा सकते हैं.

जिस ट्रक से हादसा हुआ, उसकी नंबर प्लेट में कालिख लगी थी ताकि नंबर न दिखे. मुझे नहीं पता आपकी पॉलिटिक्स क्या है. आप किस पार्टी को सपोर्ट करते हैं. आप पांच साल में बस एक दिन किसको वोट दे देते हैं. यकीन मानिए, उससे कोई फर्क नहीं पड़ता?

लेकिन क्या आपको यहां कुछ संदिग्ध नहीं लगता. दाल में कोई काला नहीं लगता. किसी की कोई साजिश नहीं लगती?

ये सब हो रहा है, खुलेआम हो रहा है. पब्लिक डोमेन में हो रहा है और हमें फर्क नहीं पड़ रहा. हम खा-पी अघा रहे हैं. बेहद आराम से. अब लोगों ने ग़लत को ग़लत कहना छोड़ दिया है क्योंकि आपको उन लोगों से सवाल पूछने में खराब लगता है, जिन पर आपने भरोसा किया था.

ये लेख पत्रकार आशीष मिश्रा के फेसबुक पेज से साभार लिया गया है। ये लेखक के निजी विचार हैं।

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