धर्म

इस बार रक्षाबंधन बहनों के लिए है बेहद खास, बन रहे हैं ये खास संयोग

Image result for इस बार रक्षाबंधन बहनों के लिए है बेहद खास, बन रहे हैं ये खास संयोग

रक्षाबंधन का त्योहार आने में महज कुछ ही दिन बाकी हैं। हिंदू धर्म में रक्षाबंधन का त्योहार सावन के पूर्णिमा को मनाया जाता है। रक्षाबंधन भाई और बहन के प्रेम का प्रतीक है। पूरे विश्व में हिंदू धर्म के अनुयायी इस त्योहार को खुशी और प्रेम से मनाते है। बहन अपने भाई की कलाई में रक्षासूत्र बाँधती है और उसकी लंबी उम्र की कामना करती हैं। भाई भी अपनी बहन की उम्र भर रक्षा करने का वचन देता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें की इस बार राखी भेजना और भी आसान हो गया है। जो लोग बाहर रहते हैं वो अपने भाईयों को सरप्राइज ऑनलाइन राखी भेज सकते हैं। जो उन्हें रक्षाबंधन के दिन ही उसके घर पर कोरिअर द्वारा मिल जाएगी। साथ ही आप अपने भाई को गिफ्ट भी ऑर्डर कर भेज सकती हैं। इस बार आप राखी के इस बंधन से रिश्ते को और भी मजबूत बना सकती हैं।

जानिए कब से मनाया जाता है रक्षाबंधन
राखी का त्योहार कब से मनाया जाता है इस बारे में अलग अलग मत और कथायें प्रचलित हैं। सबसे प्रचलित मान्यता है कि राखी का त्योहार देवी देवताओं के समय से ही मनाया जा रहा है। माना जाता है की जब देवों और दानवों के बीच युद्ध हुआ और युद्ध में जब देवता हारने लगे, तब सभी देवतागण भगवान इंद्र के पास गये और उनसे अपने प्राणो की रक्षा करने की प्रार्थना करने लगे। देवताओं को भयभीत देखकर इंद्राणी ने उनके हाथों में रक्षासूत्र बांध दिया। इससे देवताओं का आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने दानवों पर विजय प्राप्त की। तब से ही राखी बांधने की प्रथा शुरू हुई।

ज्‍योतिषियों और विद्वानों का मानना है कि इस बार रक्षाबंधन पर कई शुभ योग और संयोग बन रहे हैं। रक्षा बंधन के 4 दिन पहले ही गुरु मार्गी होकर सीधी चाल चलने लगेंगे। जो कि राखी की दृष्टि से शुभ है। इस बार रक्षाबंधन पर नक्षत्र श्रवण, सौभाग्‍य योग, बव करण, सूर्य राशि कर्क और चंद्रमा मकर में रहने वाले हैं। ये सभी शुभ संयोग मिलकर इस बार रक्षाबंधन को बेहद खास बना रहे हैं।

श्रावण मास का आखिरी दिन

रक्षाबंधन का त्‍योहार श्रावण मास के शुक्‍ल पक्ष के आखिरी दिन यानी पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन बहनें भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं और उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं और भाई बहनों की सारी जिंदगी रक्षा करने का वचन देते हैं।

भद्रा को इसलिए माना जाता है अशुभ

पौराण‍िक मान्‍यताओं के अनुसार, भद्रा को इसलिए अशुभ माना जाता है क्‍योंकि रावण ने अपनी बहन सूर्पनखा से भद्रा के दौरान राखी बंधवाई थी इसलिए एक साल के भीतर ही उसका अंत हो गया था। अगर ऐसा न हुआ होता तो रावण बच सकता था।

भद्रा को लेकर यह भी मान्‍यता

हिंदू धर्म में एक मान्‍यता और है कि जब तक किसी शुभ कार्य में त्रिदेव ब्रह्मा, विष्‍णु और महेश एक साथ उपस्थित नहीं होते तो उस मुहूर्त को शुभ नहीं माना जाता। भद्रा काल में भगवान शिव तांडव की मुद्रा में रहते हैं और वह उस वक्‍त उस शुभ कार्य में उपस्थित नहीं रह पाते। इसलिए भद्रा काल में कोई भी शुभ कार्य करने की मनाही होती है।

रक्षाबंधन का मुहूर्त

पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 14 अगस्त को 15:45 बजे से हो रहा है। इसका समापन 15 अगस्त को 17:58 पर हो रहा है। ऐसे में बहनें भाइयों को 15 अगस्त के सूर्योदय से शाम के 5:58 तक राखी बांध सकेंगी।

राखी बांधने का मंत्र

‘येन बद्धो बलिराजा, दानवेन्द्रो महाबलः तेनत्वाम प्रति बद्धनामि रक्षे, माचल-माचलः’

राखी बांधने के बाद बहनें भाई से जीवनपर्यंत रक्षा का वचन लेती हैं। वहीं भाई रक्षा के वचन के साथ प्रेम, उपहार आदि भी देते हैं

Back to top button