राजनीति

मोदी का वो बांया हाथ, जिसके नाम से बड़े-बड़े मंत्री भी जाते कांप

गुजरात के मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री बनने तक का सफर पीएम नरेंद्र मोदी के लिए काफी लंबा रहा. लेकिन उनके मुख्यमंत्री बनने का सफर काफी छोटा रहा था. वो संघ के प्रचारक थे और अचानक साल 2001 में उन्होंने मुख्यमंत्री की पद की शपथ ले ली थी. तब मोदी के पास ना ही कोई तजुर्बा था और ना ही इससे पहले वो विधायक या सांसद रह चुके थे. मोदी इस चीज से वाकिफ ही नहीं थे कि मुख्यमंत्री को किस तरीके से और क्या काम करना होता है.

मोदी खुद बताते हैं कि मुख्यमंत्री की शपथ लेने के बाद जब पहली बार साइन करने के लिए फाइलें उनके पास आईं तो उन्हें समझने के लिए एक अफसर की उन्होंने मदद ली. वो अफसर ही आज पीएम मोदी के लेफ्ट हैंड माने जाते हैं. वो प्रमोद कुमार मिश्रा थे.

जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री से पहले गुजरात में मुख्यमंत्री रहे थे, पीके मिश्रा ने ही उन्हें सब कुछ समझाया कि किस तरीके से फाइलों को पढ़ा जाता है और किस तरीके से फाइलों पर हस्ताक्षर किए जाते हैं. मिश्रा जब सरकारी नौकरी से रिटायर हुए तो नरेंद्र मोदी ने उन्हें गुजरात में इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड का कमीशनर बनाया और वो मिश्रा ही थे जिन्होंने गुजरात के गांव-गांव तक बिजली पहुंचाने का काम किया है.

जब मोदी बतौर प्रधानमंत्री 2014 में दिल्ली पहुंचे तो उनके साथ पीके मिश्रा भी दिल्ली आ गए और 2019 में भी वो मोदी के साथ बने हुए हैं. पीएम को करीब से देखने वाले कई लोग बताते हैं कि पीके मिश्रा ही एकमात्र ऐसे अफसर हैं जिन पर मोदी सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं और आज भी वह उनके सबसे खास लोगों में से हैं.

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