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अजब है ये ऐतिहासिक जगह, यहां भाई-बहन को नहीं मिलती इंट्री, जानिए वजह

कुछ बाते अक्सर सोचने पर मजबूर कर देती है. क्या ऐसा भी हो सता है आज की दुनिया में अभीकुछ खबरें ऐसी होती हैं, जिन पर भरोसा करना नामुमकिन सा  होता है. मगर जब सामने आती है तो होश तक उड़ जाते है. ऐसा ही कुछ आज हम आपको बताने जा रहे जिसे जानकर आपके रौंगटे खड़े हो जायेंगे. आज  हम आपको सभी को एक ऐसी जगह से बारे में बताने जा रहे. जहाँ  जहां सिर्फ कपल्स जा सकते हैं यानि पति-पत्नी या फिर प्रेमी – प्रेमिका। मगर भाई-बहन का इस मीनार में प्रवेश करना वर्जित है। तो बताते हैं आपको इस खास मीनार के बारे में…

 

लंका मीनार

उत्तर प्रदेश के जालौन में 210 फीट ऊंची ‘लंका मीनार’ है। इसके अंदर रावण के पूरे परिवार का चित्रण किया गया है। खास बात यह है कि इस मीनार के ऊपर सगे भाई-बहन एक साथ नहीं जा सकते हैं।

देश की दूसरी सबसे ऊंची मीनार

यह मीनार देशभर की सबसे ऊंची मीनारों में से एक मानी जाती है। कुतुबमीनार के बाद यही मीनार भारत की सबसे ऊंची मीनारों में शामिल है। इसके पास 100 फुट ऊंची कुंभकर्ण और 65 फुट ऊंची मेघनाथ की प्रतिमा है। इसके अलावा मीनार के सामने भगवान शंकर और चित्रगुप्त की मूर्ती लगी है। इस मीनार की ऐतिहासिक खूबी यह है कि इसमें केवल रावण नहीं बल्कि उसके पूरे परिवार का चित्रण मिलता है। कई पौराणिक घटनाओं को भी यहां चित्रों में उकेरा गया है।

इस मीनार के पास हर साल नाग पंचमी के दिन मेला लगता है। इसके अलावा यहां पर दंगल भी होते रहते है।

मीनार की खासियत

मीनार में एक खास बात ये भी है कि इसको बनाने के लिए ईंट, पत्थर या बालू का इस्तेमाल नहीं किया गया बल्कि इसे बनाने के लिए दाल, शंख, कौड़िया, सीप आदि के इस्तेमाल से निर्माण किया गया है। इस मीनार को बनाने में 1 लाख 75 हजार रुपए का खर्च आया था और करीब 20 साल में जाकर ये मीनार तैयार हुई थी।

रावण के स्नेह में लंका मीनार का निर्माण

दरअसल, इस मीनार को बनवाने के पीछे भी एक बहुत ही दिलचस्प कहानी है। इसका निर्माण एक ऐसे व्यक्ति ने कराया था जो खुद रामलीला में रावण का किरदार निभाते थे। इनका नाम स्व. मथुरा प्रसाद है। 1875 में उन्होंने इस मीनार का निर्माण कराया था। रामलीला में रावण का किरदार निभाते निभाते इनके मन में रावण के प्रति इस तरह स्नेह हो गया था कि उन्हें लंका मीनार का निर्माण करा दिया। 1875 में मथुरा प्रसाद निगम ने रावण की स्मृति में यहां 210 फुट ऊंची मीनार का निर्माण कराया था, जिसे उन्होंने लंका का नाम दिया।

 

भाई-बहन का प्रवेश वर्जित

इस मीनार की ऐसी मान्यता है कि यहां भाई-बहन का प्रवेश निषेध है। यानि भाई बहन एक साथ इसमें प्रवेश नहीं कर सकते। इसका कारण है कि लंका मीनार की नीचे से ऊपर तक की चढ़ाई में सात परिक्रमाएं करनी होती है, जो भाई-बहन एक साथ नहीं कर सकते हैं। लंका मीनार में छत में पहुंचने के लिए जो घुमावदार रास्ता है और वह सात फेरे पूरे करता है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार विवाह में भी सात फेरों की मान्यता है इसी कारण भाई-बहन का एक साथ प्रवेश करना वर्जित है।

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