दिल्ली की ये 12 सीटें हैं स्पेशल, जो जीता वो पाया सत्ता

0
24

. दिल्ली की 70 सदस्यीय विधानसभा की 12 सीटें आरक्षित हैं. चुनावी इतिहास गवाह है कि जो दल इन 12 आरक्षित सीटों को अपने पक्ष में करने में सफल रहा, वही सत्ता पर काबिज हुआ. आरक्षित सीटों में अंबेडकर नगर, त्रिलोकपुरी, करोल बाग, पटेल नगर, सीमापुरी, मंगोलपुरी, सुल्तानपुर माजरा, मादीपुर, गोकलपुर, बवाना, देवली और कोंडली सीट शामिल है. ऐसे में तीनों ही राजनीतिक दल इन सीट पर जीत हासिल करने में जुटे हैं.

चुनावी इतिहास को देखा जाए तो इन 12 सीट में अधिकतर सीट एक ही राजनीतिक दल के पास होती हैं. यही वजह है कि वह पार्टी में सत्ता में रही है. 1998 से लेकर 2008 तक कांग्रेस इन 12 में से 80 फीसदी सीटों पर काबिज रही. कांग्रेस इस दौरान हुए 3 चुनावों में 3 बार सत्ता में काबिज रही.2008 तक के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का इन पर कब्जा रहा. अब सभी सीटें आप के कब्जे में हैं. 2013 के विधानसभा चुनाव में इनमें से अधिकांश सीट पर आम आदमी पार्टी का कब्जा रहा. 2015 में हुए चुनाव में यह सभी सीटें उसकी झोली में गईं. दोनों बार आम आदमी पार्टी सत्ता में रही. बीजेपी के लिए यह 12 सीट सबसे कमजोर रही हैं. पार्टी बीते दिनों कांग्रेस के राजकुमार चौहान को इसीलिए अपने साथ लेकर आई थी जिससे इन सीट पर अपनी स्थिति मजबूत कर सके. मगर, वह फिर कांग्रेस में वापस चले गए.

दिल्ली की 12 आरक्षित सीट पर ज्यादातर झुग्गी झोपड़ियां और कच्ची कॉलोनियां पड़ती हैं. इन पर जिस राजनीतिक दल का असर अधिक दिखता है, उसका प्रभाव दूसरी सीटों पर भी दिखता है. आरक्षित सीट वाली विधानसभाओं में पड़ने वाले इलाकों में बुनियादी सुविधाएं सबसे बड़ा मुद्दा है. इनमें कच्ची कॉलोनियां और जेजे कॉलोनी आती हैं. यहां के लोग अब भी सीवर, पानी जैसी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं. यही कारण है कि बीजेपी इन सीटों पर कच्ची कॉलोनी पास किए जाने का मुद्दा भुना रही है. वहीं, आम आदमी पार्टी का कहना है कि उसने इन इलाकों में पहले ही बहुत काम किया है.