द फॉरगॉटेन आर्मी : नेताजी के काम और इतिहास के साथ खिलवाड़ किए हैं कबीर खान

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कभी चाशनी के बिना गुलाब जामुन, आलू के बिना समोसा नहीं बनता वैसे ही नेताजी के बिना इंडियन नेशनल आर्मी की कहानी दिखाना इतिहास के साथ खिलवाड़ है और ये काम कबीर खान ने किया है।  हाल ही में मैंने स्ट्रीट डांसर 3डी का सदमा बर्दाश्त करने के बाद देखी द फॉरगॉटेन आर्मी। यह नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के नेतृत्व में आज़ाद हिन्द फौज द्वारा भारत की स्वाधीनता के लिए लड़े गए स्वाधीनता संग्राम पर आधारित एक 5 एपिसोड वेब सीरीज़ है, जो Amazon प्राइम पर अभी स्ट्रीम हो रही है। यहां मुख्य रोल में है सनी कौशल और शर्वरी वाघ, और उनका साथ दिया है रोहित चौधरी, एमके रैना, करणवीर मल्होत्रा, टीजे भानु, आर बद्री ने।

कहानी

इस फिल्म की कहानी कर्नल सुरिन्दर सोढ़ी पर आधारित है, जो सिंगापुर में अपने परिवार से मिलने आते हैं। उनकी कहानियों से प्रेरित होकर उनका फोटोजर्नलिस्ट पोता अमर बर्मा में मिलिटरी जुंटा के विरुद्ध विद्यार्थियों द्वारा चलाये जा रहे विरोध प्रदर्शन को कवर करने के लिये जा रहा है।

कर्नल सोढ़ी अपने पोते के साथ बर्मा आने को तैयार हो जाते हैं, और वहाँ का ‘वर्तमान’ परिदृश्य उन्हें जाना पहचाना सा लगने लगता है। कैसे इंडियन नेशनल आर्मी के सिपाही के तौर पर सुरिंदर सोढ़ी और उनके साथियों ने भारत की स्वतन्त्रता के लिये अंग्रेजों से मोर्चा संभाला था, और कैसे वे उस अनुभव को दोबारा जीते हैं, ये द फॉरगॉटेन आर्मी का पूरा सार है।

रिव्यु 

द फॉरगॉटेन आर्मी के साथ वही समस्या है जो पानीपत के साथ थी। मूल विषय से हटकर कुछ चुनिन्दा चरित्रों पर पूरी वेब सीरीज़ का ध्यान केन्द्रित किया गया था। कहा जाता है कि इसे एचबीओ की प्रसिद्ध मिनी सीरीज़ बैंड ऑफ ब्रदर्स’ की शैली में फिल्माया गया था। अगर ये सच है, तो द फॉरगॉटेन आर्मी पूरी तरह फिसड्डी निकली है।

ये सीरीज़ नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के साथ किसी अन्याय से कम नहीं है। नेताजी को केवल खानपूर्ति के लिये एक दृश्य तक सीमित कर दिया गया, और इसी तरह न लाल किले के ट्रायल पर प्रकाश डाला गया न ही आईएनए से प्रेरित हो कर रॉयल इंडियन नेवी और रॉयल इंडियन एयर फोर्स के सदस्यों द्वारा किए गए विद्रोह पर ध्यान केन्द्रित किया गया।  बिना नेताजी के इंडियन नेशनल आर्मी के बारे में सोचने का मतलब बिना गांधी के दांडी मार्च या बिना अन्ना हज़ारे के लोकपाल आंदोलन की कल्पना करने के बराबर होगा।

टेक्निकल पहलू 

अब यदि आपको बताया जाये कि ये सीरीज़ 150 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गयी है, तो आप निस्संदेह हँसोगे। यह स्वाभाविक भी है, क्योंकि टेक्निकल क्षेत्र में ये वेब सीरीज़ औंधे मुंह गिरी है। कई जगह इसके वीएफ़एक्स को देख तो पलटन और ठग्स ऑफ हिन्दोस्तान के वीएफ़एक्स निर्माता अपनी पीठ थपथपाने लगेंगे, कि चलो कोई तो हमसे घटिया वीएफ़एक्स लाया है। अरिजीत सिंह की आवाज में ‘आजादी के लिये’ एक बढ़िया गीत है, परंतु जिस तरह से इसे वेब सीरीज़ में literally घिसा गया है, उसे देख तो आप भी कहेंगे –

कास्टिंग

किसी भी फिल्म की कास्टिंग उसे बनाने या बिगाड़ने का काम करती है, जैसे बाहुबली में प्रभास को मुख्य रोल में लेना, या फिर तान्हाजी में शरद केलकर को छत्रपति शिवाजी महाराज का रोल देना। परंतु द फॉरगॉटेन आर्मी का सबसे बड़ा drawback उसकी ऊटपटाँग कास्टिंग है। जब कैप्टन लक्ष्मी सहगल जैसी प्रभावशाली सैन्य अधिकारी के लिये श्रुति सेठ जैसी अभिनेत्री को चुना जाये, तो आप समझ सकते हैं कि कास्टिंग निर्देशक ने कितनी मेहनत की है।

सुरिंदर सोढ़ी के रूप में सनी कौशल ने प्रयास तो पूरे किए हैं, परंतु कई जगह वे असहज दिखे हैं। आप कई जगह उनकी तुलना उनके बड़े भाई विकी कौशल से भी करोगे जिन्होंने उरी – द सर्जिकल स्ट्राइक में ऐसे ही दृश्यों में जोश भर दिया था। अमला अक्किनेनी जैसी अभिनेत्री का cameo भी व्यर्थ गया है। अब सूत्रधार के तौर पर शाहरुख खान के प्रभाव में हम जितना कम बोलें, उतना ही अच्छा।

एजेंडा

इसके अलावा द फॉरगॉटेन आर्मी जिस चीज़ से अधिक पीड़ित है, वो ज़बरदस्ती ठूँसा गया प्रोपगैंडा। कबीर खान के सीएए पर विचारों से कोई भी अनभिज्ञ नहीं है, परंतु उसे एक ऐसे प्रोजेक्ट में include करना, जहां इसका न कोई औचित्य है, और न ही कोई आवश्यकता, किसी मज़ाक से कम नहीं लगता। जनता अब ज़बरदस्ती के प्रोपगैंडा से ऊबने लगी है, जिसका असर सेक्रेड गेम्स के सीजन 2 के प्रदर्शन पर भी दिखा था। पर ऐसा लगता है कबीर खान ने उससे कोई सबक नहीं लिया है, क्योंकि उनके तो लिये एजेंडा ऊंचा रहे हमारा।

परंतु इस वेब सीरीज़ में कुछ अच्छी बातें भी है, जिसे हमें नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। एक्शन दृश्यों में शाम कौशल ने काफी बढ़िया काम किया है, और उदाहरण के तौर पर जिस तरह जापानी सैनिक Allies की टुकड़ी पर धावा बोलते हैं, वो भी देखने योग्य है। असीम मिश्रा ने भी सिनेमैटोग्राफी में कई प्रभावशाली दृश्य फिल्माए हैं।

सीरीज़ की कास्टिंग की आलोचना अवश्य की जा सकती है, परंतु रोहित चौधरी, एमके रैना और शर्वरी वाघ ने अपनी भूमिका के साथ न्याय अवश्य किया है। यदि सीरीज़ शर्वरी और सनी के बीच के रोमांटिक दृश्यों पर ज़्यादा केन्द्रित न होती, तो शर्वरी का रोल और भी प्रभावशाली हो सकता था।

कुल मिलाकर द फॉरगॉटेन आर्मी एक औसत वेब सीरीज़ है, जो पानीपत की भांति मूल विषय से भटककर फालतू के विषयों आधारित है। ये सीरीज़ न केवल नेताजी बलिदान का उपहास है, परंतु उन हजारों लोगों के साथ भी अन्याय है, जिन्होंने स्वतंत्र भारत के लिये अपना सर्वस्व अर्पण कर दिया। रेटिंग अनुसार इसे मिलते हैं 5 में से 2.5 स्टार।