आजादी से पहले पटेल को माना दुनिया ने “THE BOSS”

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statue of unity Gujarat

अहमदाबाद। गुजरात के केवड़िया कालोनी में बुधवार को सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा का लोकार्पण भारत के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी करेंगे। इसे विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा का खिताब सिर्फ तीन साल तक ही मिल पायेगा क्योंकि इसके बाद महाराष्ट्र के अरब सागर में बन रहे छत्रपति शिवाजी के स्मारक को सबसे ऊंचा होने का खिताब मिल जाएगा।

15 अगस्त 1947 को जब भारत आजाद हुआ तो उससे कुछ महीनों पहले दुनिया की सर्वाधिक प्रतिष्ठित मैग्जीन्स में से एक टाइम मैग्जीन के कवर पर एक भारतीय नेता छा गया। जनवरी 1947 में कवर पेज पर इस नेता को लेकर टाइम ने टाइटल लगाया ‘द बॉस’। वह नेता थे आजाद भारत के पहले उप प्रधानमंत्री, पहले गृहमंत्री, देश के सर्वाधिक कद्दावर नेताओं में से एक और महान स्वतंत्रता सेनानी सरदार वल्लभभाई पटेल। भारत की 562 देसी रियासतों को एकसूत्र में पिरो कर आजाद भारत की नई तस्वीर बनाने वाले सरदार पटेल की स्टैचू ऑफ यूनिटी का अनावरण आज पीएम मोदी करने जा रहे हैं।

भारत के ‘बिस्मार्क’ और लौह पुरुष के नाम से विख्यात सरदार पटेल की स्टैचू ऑफ यूनिटी दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है। 182 मीटर की यह प्रतिमा अमेरिका की मशहूर स्टैचू ऑफ लिबर्टी से करीब दोगुनी ऊंची है। साधु बेट टापू पर इस प्रतिमा को बनाने में 2979 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। ब्रोन्ज, स्टील जैसी तमाम चीजों से मिलाकर बनी यह प्रतिमा शूलपनेश्वर वन्यजीव अभयारण्य की विंध्य और सतपुड़ा की पहाड़ियों के सामने बनी है। 31 अक्टूबर को सरदार पटेल और पूर्व पीएम इंदिरा गांधी का जन्मदिन होता है। एक तरफ पीएम मोदी सरदार पटेल की भव्य प्रतिमा का अनावरण कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी के 2019 लोकसभा चुनावों का कैंपेन भी शुरू हो रहा है।

2010 में मोदी ने प्रतिमा बनाने की योजना बनाई थी
2010 में मोदी जब गुजरात के सीएम थे तब उन्होंने स्टैचू ऑफ यूनिटी बनाने की योजना बताई थी। मोदी ने तब कहा था कि यह उस महान शख्स के लिए श्रद्धांजलि होगी जिन्होंने भारत को एक किया। तब सीएम मोदी ने घोषणा की थी कि राज्य सरकार और मेरी पार्टी (बीजेपी) ने सरदार पटेल की दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा बनाने का फैसला लिया है। बीजेपी का चुनावी कैंपेन भी सरदार पटेल की स्टाइल में ‘गुड गवर्नेंस’ के नारे के साथ चला। 2002 की गुजरात गौरव यात्रा के बाद मोदी को राज्य में ‘छोटे सरदार’ की उपाधि भी मिली।

शुरुआत में गुजरात सरकार में मोदी सरकार के 10 साल को चिन्हित 2012 के राज्य चुनावों तक स्टैचू ऑफ यूनिटी बनाने की योजना थी। बाद में सरदार पटेल की यह प्रतिमा 2014 आम चुनावों के बीजेपी कैंपेन का केंद्रीय बिंदु बनी। बीजेपी ने तब सरदार पटेल को ध्यान में रखते हुए बड़ी रैलियों और ‘रन फॉर यूनिटी’ जैसे मैराथन का आयोजन किया गया।

जानिए, कितनी भव्य है सरदार पटेल की स्टैचू ऑफ यूनिटी
भारत के लौह पुरुष की यह प्रतिमा अपने डिजाइन और स्केल, दोनों के लिहाज से भव्य है। इस प्रतिमा के साथ एक कॉम्प्लेक्स भी तैयार किया गया जिसमें एक होटल, मेमोरियन गार्डन और विजिटर सेंटर है। स्टैचू ऑफ यूनिटी सरदार सरोवर बांध से 3.5 किमी की दूरी पर है। नर्मदा रीवर बेड पर बनी इस विशाल प्रतिमा को सपॉर्ट देने के लिए अद्भुत इंजिनियरिंग भी की गई है।

प्रॉजेक्ट की वेबसाइट के मुताबिक इस प्रतिमा के निर्माण के लिए देशभर के किसानों से उनके उपकरणों के रूप में 700 टन आयरन और मिट्टी के करीब 3 लाख सैंपल इकट्ठा किए गए हैं। माना जा रहा है कि स्टैचू ऑफ यूनिटी के तैयार हो जाने से अब बीजेपी को अपने 2019 के चुनावी कैंपेन में राष्ट्रीय एकता के संदेश के रूप में इसका इस्तेमाल करने का मौका मिलेगा।

राजनीति विज्ञान के एक्सपर्ट दिनेश शुक्ला का कहना है कि मोदी ने 2014 लोकसभा चुनाव प्रचार के लिए स्टैचू ऑफ यूनिटी का इस्तेमाल किया और अब जबकि यह तैयार है तो 2019 में इसका इस्तेमाल कर लोगों को संगठित करने की कोशिश करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि जब गुजरात की लोकसभा सीटों की बात आएगी तो स्टैचू ऑफ यूनिटी 2019 में बीजेपी को फायदा पहुंचा सकती है।