क्राइम

धरम का जाप करते ये मरे हुए लोग..जिंदा लाश से करवाया जा रहा दूसरों का कत्ल

तबरेज़ अंसारी को तड़पा-तड़पा कर मार डालने वाले जिंदा ड्रैकुलाओं के झुंड महज इस्तेमाल करके फेंक दिए जाने वाले मूर्ख मोहरे हैं… जॉम्बी हैं! अपराधी ये जॉम्बी या जिंदा ड्रैकुला के झुंड नहीं हैं, वे हैं, जिनके कारखाने में करीने से इन्हें तैयार किया जाता है!

इन जॉम्बियों को कठघरे में खड़ा करने से पहले उन्हें बनाने वाले कारखानों के मालिकों से पूछिए जो अब राजदरबार में बैठे दुनिया के अश्लीलतम अध्याय रचे रहे हैं..!

राजदरबार में किसी को जलील करने के लिए लगाए गए ‘जय श्रीराम’ के नारों और तबरेज़ के हलक में डाले गए इन्हीं नारों में आपको क्या फर्क लगता है?

तबरेज़ को मार डालने वाले मूर्ख बीमार जिंदा ड्रैकुलाओं को तो यह भी पता नहीं कि भीड़ बन कर बर्बरता से मार तो डाला इन्होंने, लेकिन हत्या के अपराध में गिरफ्तार होने के बाद इनका या इनके परिवार और उनके समूचे भविष्य का क्या होगा!

सभी जिंदा ड्रैकुलाओं की तकदीर ऐसी नहीं होती कि कोई राजा या उसका कोई मंत्री उन्हें मुकदमा लड़ने के लिए पैसे देगा या जेल से जमानत पर बाहर आने पर फूलों की हार पहनाएगा..!

उनका कुछ भी हो, लेकिन इन मूर्खों को इतना भी कहीं पता कि पहले तो उन्हें ही मार डाला गया है… फिर उनकी जिंदा लाश से दूसरों का कत्ल करवाया जा रहा है..!

धरम का जाप करते ये मरे हुए लोग..! इस सवाल का जवाब तलाशिए कि यह आतंकवाद नहीं है तो और क्या है..!

ये लेख स्वतंत्र टीकाकार अरविंद शेष के फेसबुक पेज से साभार लिया गया है। ये लेखक के निजी विचार हैं।

Back to top button