दिवाली के दिन चली गई थी आंखों की रोशनी, हरियाणा के बेटे ने भारत को जिताया वर्ल्ड कप

हरियाणा की धरती से बहुत से युवा और लड़कियां हर क्षेत्र में अपने प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं. वहीं हरियाणा के ही रहने वाले दीपक मलिक ने अपने साहस, संघर्ष और हौसले से क्रिकेट की दुनिया में कदम रख अपने सपने को साकार किया. बीते शुक्रवार को हुए ब्लाइंड क्रिकेट विश्व कप में भारत ने पाकिस्तान को सात विकेट से हरा दिया. ब्लाइंड क्रिकेट वर्ल्ड कप में हरियाणा के दीपक मलिक (बी 3) भारत की तरफ से सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे और उन्होंने 71 गेंदों पर नाबाद 79 रन की पारी खेली. इतना ही नहीं दीपक के हौंसले अौर सफलता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें सम्मानित भी किया था.

दिवाली में हुआ था हादसा

दीपक के कहानी काफी इंस्पायर करने वाली हैं. उन्हें बचपन से क्रिकेट खेलने का काफी शौक था, लेकिन साल 2004 में जब वो 8 साल के थे. तब दिवाली में हुए एक हादसे में उनकी आंखों की रोशनी चली गई. जिसके बाद उनके लिए क्रिकेट का रास्ता काफी मुश्किल हो गया. सचिन को खेलते हुए देखने वाले दीपक ने हार नहीं मानी, उन्होंने अपना इलाज करवाया, लेकिन डॉक्टर ने कहा कि वो सिर्फ 6 मीटर तक ही देख पाएंगे.

कमजोरी को बनाया ताकत

दीपक ने दिल्ली के इंस्टीट्यूशन ब्लाइंड स्कूल से पढ़ाई की है. इस बीच वह दिल्ली के ब्लाइंड स्कूल में पहुंचे और यहां क्रिकेट खेलने लगे.दीपक ने इसी कमजोरी को अपनी ताकत बनाया और प्रैक्टिस शुरू की. उसने क्रिकेट खेलना जारी रखा. धीरे-धीरे उन्होंने स्कूल लेवल क्रिकेट से स्टेट लेवल क्रिकेट तक में खुद की एक पहचान बनाई.ब्लाइंड क्रिकेट में भारतीय टीम को वर्ल्ड कप चैंपियन और एशिया कप जैसे खिताब दिलवा चुके हैं. दीपक मलिक नेत्रहीन क्रिकेट में बी -3 कैटेगरी के क्रिकेटर हैं.दीपक ने बताया कि देश के लिए खेलना हमेशा गौरवशाली होता है. मुझे उम्मीद है कि मैं अपनी प्रतिभा के साथ न्याय करने में सफल रहूंगा.

इन तीन कैटेगरी में

ब्लाइंड क्रिकेट टीम में खिलाड़ियों का चयन तीन कैटेगरी में होता है. पहली कैटेगरी बी -1 होती है जिसमें पूरी तरह दृष्टिहीन 4 खिलाड़ी होते हैं. दूसरी कैटेगरी बी -2 होती है, जिसमें ऐसे 3 खिलाड़ी होते हैं जिन्हें 3 मीटर तक दिखाई देता है. तीसरी कैटेगरी होती है बी -3, जिसमें 4 ऐसे खिलाड़ी होते हैं जिन्हें लगभग 6 मीटर तक दिखता है.