खेल

चियरलीडर्स लगातीं IPL में चार चांद, फिक्सिंग के चक्कर में झेलीं बैन, पार्टियों की भी बढ़ातीं शान

2008 में आईपीएल की शुरुआत हुई, साथ में पहली बार क्रिकेट जगत में चीयरलीडर्स भी आईं. शुरू में चीयरलीडर्स का बहुत विरोध किया गया क्योंकि चीयरलीडर्स छोटे- छोटे कपड़ो में आकर्षक डांस करती थी. विरोध के बाद कुछ टीमों ने अपने चीयरलीडर्स को अपने राज्य के पारंपरिक वेश में पेश करना शुरू कर दिया और उनके डांस को भी स्थनीय डांस में बदल दिया. लेकिन ये फ़ॉर्मूला अधिक दिनों तक नहीं चला और फिर से चीयरलीडर्स छोटे और आकर्षक कपड़ो में टीम के थीम सॉंग पर ही डांस करने लगीं.

अगर चीयरलीडर्स के देशो की बात करे तो ये आईपीएल में नार्वे, साऊथ अफ्रीका, बेल्जियम, रूस और यूक्रेन से आती है. चीयरलीडर्स आमतौर पर सिर्फ़ 2 या 3 महीने के लिए ही आती है पर कुछ यही पर और भी प्रोग्राम में शामिल होकर पैसे कमाने लगती हैं.

चीयरलीडर्स धीरे-धीरे आईपीएल की पार्टी का भी हिस्सा बनने लगी हालाकि उसके लिए इनको अलग से पैसे दिए जाते है. चीयरलीडर्स को सिर्फ़ एक मैच का ही 6000 से 10000 तक दिया जाता है जिसके बाद आईपीएल पार्टी का पैसा इनको अलग से मिलता है.

आईपीएल के छठे सीजन में जब फिक्सिंग नाम आईपीएल में आया तो कई लोगों ने इसकी वजह चीयरलीडर्स को ही माना और इनपर बैन लगाने की मांग करने लगे. जिसके बाद बीसीसीआई के तत्कालीन प्रमुख एन. श्रीनिवासन की जगह जगमोहन डालमिया प्रमुख बने तो उन्होंने इस पर बैन लगा दिया लेकिन ये भी ज्यादा दिन नहीं चल पाया और चीयरलीडर्स की दोबारा आईपीएल में वापसी हो गयी.

Back to top button