शरीर के इस हिस्से को शिकार बना रही ये बीमारी, वक्त पर नहीं कराया इलाज तो हो जाएंगे परेशान

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आजकल भागदौड़ भरी जिन्दगी में लोग अपने स्वास्थ्य का ख्याल नहीं कर रख पाते हैं. स्वस्थ्य रहने के लिए अपने शरीर का ध्यान रखना अति आवश्यक है नहीं तो कोई भी गंभीर बीमारी आपको भी घेर सकती है. अभी हाल ही में एक बीमारी आग की तरह फ़ैल रही है जिसका समय के चलते इलाज नहीं कराया तो आप भी इसके शिकार हो सकते हैं. आज हम आपको जिस बीमारी के बारे में बताने जा रहे हैं उससे शरीर में होने वाले नुकसान को जानकर आपके भी होश उड़ सकते हैं. यह बीमारी बहुत तेजी से लोगों में फ़ैल रही है|

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस बीमारी को अगर आपने शुरुआत में ही समझ लिया और इसका इलाज करा लिया तो शायद आपको इससे निजात मिल सकती है. जिस बीमारी के बारे में हम बात कर रहे हैं भारत में इस बीमारी को थ्रोट इन्फेक्शन के नाम से जाना जा रहा है. राजस्थान सहित पूरे उत्तर-भारत में लोग इस बीमारी के चपेट में आ चुके हैं. ख़ासतौर पर खांसी तीन से चार दिन में ठीक हो जाती है लेकिन इस बीमारी में नहीं होती है. इसे सही होने में 10-15 दिन का समय लग रहा है.

स्ट्रेप  थ्रोट और सोर थ्रोट दोनों ही गले की ऐसी समस्याएं हैं जिनमें अंतर करना मुश्किल होता है। एक जैसे क्षणों की वजह से कई बार लोग समझ नहीं पाते कि उनके गले में जो दर्द व सूजन है वो सामान्य दिक्कत नहीं बल्कि स्ट्रेप थ्रोट है। सोर थ्रोट सामान्यत: वायरल इन्फेक्शन से होने वाली समस्या है जबकि स्ट्रेप थ्रोट स्ट्रेपटोकोकस नाम के बैक्टीरिया की वजह से होने वाला एक संक्रामक रोग |

गले में दिक्कत की वजह सोर थ्रोट (गले में सूजन) या स्ट्रेप थ्रोट दोनों हो सकती हैं। इन दोनों स्थितियों में कुछ समानताएं भी हैं और कुछ अंतर भी। सोर थ्रोट में गले में दर्द और खराश की समस्या होती है। गले में दर्द सोर थ्रोट का सबसे पहले सामने आने वाला लक्षण होता है जबकि स्ट्रेप थ्रॉट गले में बैक्टीरियल इन्फेक्शन की वजह से होता है। इसमें भी गले में खराश की समस्या होती है। स्ट्रेप थ्रॉट सोर थ्रॉट के मुकाबले कम पाया जाता है। अमूमन लोग एक जैसे लक्षणों की वजह से इन दोनों समस्याओं में अंतर नहीं कर पाते। समस्या को ठीक से न समझ पाने के कारण उसका इलाज भी ठीक नहीं होता।

सोर थ्रोट का सबसे सामान्य कारण वायरल इन्फेक्शन होता है। ऐसे कई वायरस हैं, जिनकी वजह से सोर थ्रोट होता है। रीनोवायरस, मीजल्स, इन्फ्लूएंजा और अन्य वायरस फैरिन्जाइटिस के स्रोत हैं। बैक्टीरिया के कारण भी गले में सूजन की समस्या हो सकती है। कुछ बैक्टीरियल इन्फेक्शन काफी खतरनाक होते हैं। जैसे कि डिप्थीरिया। इसमें गले की झिल्ली बंद हो जाने से श्वास बन्द हो सकती है।

थ्रोट इन्फेक्शन के लक्षण

सोर थ्रोट के सामान्य लक्षण इस तरह से हैं- लाल और सूजा हुआ गला। टोनसिल्स में सूजन। टोनसिल्स शरीर के इम्यून सिस्टम का हिस्सा होते हैं। जब टोनसिल्स सूज जाते हैं, तो पूरे गले में दर्द बढ़ जाता है। इस बीमारी में फेफड़ों में दर्द होता है और कंजस्टिड महसूस होता है। इससे पूरा श्वसन तंत्र संक्रमित हो सकता है। नासिका मार्ग बंद होने की वजह से सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। सोर थ्रोट के साथ बुखार होना आम है क्योंकि इम्यून सिस्टम वायरस को खत्म करने की कोशिश कर रहा होता है। यदि आपको ये सब लक्षण दिखाई पड़ रहे हों तो समझ जाएं कि आपको सोर थ्रोट की समस्या है।

अगर आपको भी इस तरह की खांसी है, साँस लेने में दिक्कत होती हो या खांसते समय आँखों में से पानी आता हो तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क कर इसका इलाज करवाएं.