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कुछ कांग्रेसियों के लिए गैंग बनी राहुल टीम, कामकाजी अध्यक्षों को ले उठने लगे सवाल…

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नई दिल्ली । दिल्ली कांग्रेस की जिम्मेदारी बुजुर्ग शीला दीक्षित के कंधे पर डालने के बाद उनको मदद करने, उनके कामकाज में हाथ बंटाने के लिए देवेंद्र यादव, हारून यूसुफ, राजेश लिलोठिया को कामकाजी अध्यक्ष बना दिया गया है। राहुल गांधी की अगुवाई में पार्टी में किसी निर्णय में मेरिट पर व लाजिक के आधार पर पदाधिकारी बनाने की प्रक्रिया खत्म सी हो गई है। उसकी जगह गैंगबाजी ने ले ली है जिससे पार्टी का बंटाधार होने की संभावना बढ़ती जा रही है।

दिल्ली की 7 लोकसभा सीटों में से 3 पर जाट मतदाताओं का प्रभाव है | 4 पर गुज्जर मतदाता की संख्या प्रत्याशी को जिताने-हराने वाली है और पूर्वांचलियों की संख्या तो दिल्ली के सभी सातों लोकसभा सीटों पर प्रत्याशियों के मतों को निर्णायक मोड़ देने वाली है। दिल्ली में पूर्वांचलियों की जनसंख्या लगभग 35 प्रतिशत है। लेकिन किसी जाट , गुज्जर या पूर्वांचली को कामकाजी अध्यक्ष नहीं बनाया गया जिसके कारण लोग कहने लगे हैं कि कांध्यक्ष राहुल गांधी के यहां गैंगबाजी शुरू हो गई है। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता 51 वर्षीय रणदीप सुरजेवाला दिल्ली से सटे हरियाणा के कैथल विधान सभा क्षेत्र से विधायक हैं । वह जाट जाति के हैं। लेकिन उन्होंने राहुल गांधी से घनिष्ठता का लाभ उठाकर दिल्ली में भी किसी जाट नेता को नहीं उभरने देने और अपना वर्चस्व बढ़ाते जाने की रणनीति के तहत यहां किसी जाट को प्रदेश कांग्रेस का कामकाजी अध्यक्ष नहीं बनाने दिया। उन्होंने जाट नेता सज्जन कुमार के जेल जाने के बाद राज्य में और किसी जाट नेता को नहीं बढ़ाकर अपने चहेते अहीर देवेन्द्र यादव को कामकाजी अध्यक्ष बनवा दिया।

पूर्व मंत्री हारून यूसूफ जो दिल्ली चांदनी चौक इलाके में नहीं रहते हैं , दक्षिण दिल्ली या अक्षर धाम मंदिर के बगल में खेलगांव के फ्लैट में रहते हैं, उनको मुसलमान और अपने खेमे के होने के चलते शीला दीक्षित ने कामकाजी अध्यक्ष बनवा दिया और राहुल गांधी के सचिव के.राजू ने अपने चहेते राजेश लिलोथिया (अनुसूचित जाति ) को कामकाजी अध्यक्ष बनवाया। जबकि किसी जाटव को कामकाजी अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए था। इसमें पूर्वी दिल्ली का भी कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। इस सबके कारण कांग्रेस में कहा जाने लगा है कि रिवर्स गियर में गाड़ी चलाकर शीला दीक्षित को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बना दिया गया। राहुल गांधी की अगुवाई में पार्टी में किसी निर्णय में मेरिट पर व लाजिक के आधार पर पदाधिकारी बनाने की प्रक्रिया ख़त्म सी हो गई है। उसकी जगह गैंगबाजी ने ले ली है मात्र अनुशंसाओं के जरिये पदाधिकारी बनाये जा रहे हैं जिससे पार्टी का बंटाधार होने की संभावना बढ़ती जा रही है और पार्टी के फैसले पर सवाल भी उठने लगे हैं

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