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चमकी बुखार से अब तक 135 की मौत, आखिर कौन है इसका जिम्मेदार, “4जी” या कोई और…

मुजफ्फरपुर में 2014 में भी जापानी बुखार से हुई थी मौतें

पटना । मुजफ्फरपुर के अलावा बिहार के अन्य जिलों में भी पाँव पसार रहे चमकी बुखार  से मरने वाले बच्चों की संख्या मंगलवार को बढ़ कर 135 हो गई । विगत 18 दिनों से मुजफ्फरपुर को अपनी चपेट में ले चुके इस बुखार की गूँज राष्ट्रीय स्तर पर होने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार कोजफ्फरपुर में अस्पताल का दौरा किया जहां उन्हें लोगों का भारी विरोध झेलना पड़ा । हालांकि इस तरह केविरोध की सम्भावना को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई थी और निरीक्षण के समय अस्पताल में मीडया समेत किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश को रोक दिया गया था ।

नीतीश कुमार के  दौरे के दिन भी एसकेएमसीएच में चमकी से पीड़ित चार बच्चों की मौत हो गई जिसके बाद यहाँ मरनेवालों की संख्या बढ़ कर 135 हो गई । हालांकि मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी आलोक रंजन घोष ने मुजफ्फरपुर में मंगलवार तक 108 बच्चों के ही मरने की पुष्टि की ।

उन्होंने कहा कि केजरीवाल और एसकेएमसीएच अस्पताल समेत मुज़फरपुर में अभी तक एइएस के 485 मामले सामने आये थे जिनमें से 153 बच्चों को चिकित्सा के बाद छोड़ दिया गया । उन्होंने कहा कि 161 बच्चों का अभी भी इलाज चल रहा है जिनमें से 40 की स्थिति बेहतर है और उन्हें कभी भी डिस्चार्ज किया जा सकता है. उन्होंने कहां कि 16 बच्चों की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार इस बीमारी से मुजफ्फरपुर में 112 , वैशाली में 12, बेगूसराय में 6 , पटना और मुंगेर में दो – दो तथा पूर्णियां में एक बच्चे की मौ हो गई । इस बीच इस बीमारी से पीड़ित मुजफ्फरपुर में 56 मरीजों को मंगलवार को अस्पताल में भर्ती किया गया ,पूर्वी चम्पारण के मोतिहारी में 44 बच्चे अस्पताल में भर्ती किये गए , सीतामढ़ी में 17, वैशाली में 11 , शिवहर में 10 मुंगेर में छह बच्चों को भर्ती किया गया । इस बीमारी से मरनेवाले बच्चों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये अनुदान की मुख्यमंत्री की तरफ से की गई घोषणा के बाद अभी तक 54 परिवारों को मुआवजा दिया गया है ।

राज्य के मुख्य सचिव दीपक कुमार ने कहा कि इस बीमारी के लक्षण दिखते ही तुरंत अस्पताल पहुँचना जरूरी है क्योंकि देर से अस्पताल पहुंचने के कारण ज्यादा बच्चों की मौत हुई । एईएस पीड़ित सभी बच्चों के इलाज सरकार की तरफ से किये जाने का मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है । मरीजों को अस्पतालों में आने के लिए कोई खर्च नहीं उठाना पड़ेगा और उनके किराये का खर्च भी सरकार वहन करेगी ।

उन्होंने कहा कि अस्पताल लाने के लिए आर्थिक मदद के रूप में मरीज के परिजनों को 400 रुपये दिये जायेंगे । सभी बच्चों में बीमारी का कंडीशन अलग अलग देखते हुए इस बीमारी के फैलने की विशेषज्ञों की टीम बुधवार से जांच शुरू करेगी । इस बीमारी का फिलहाल लक्षण आधार पर ही इलाज किया जा रहा है । इस बीच आशा कार्यकर्ताओं, ए एन एम् और आंगनबाड़ी सेविकाओं को इस बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता के लिए लगाया जाएगा । घर घर तक ओआरएस का घोल पहुंचाने का निर्देश भी सरकार ने दिया है । पीएमसीएच और डीएमसीएच से चिकित्सकों की टीम को मुजफ्फरपुर भेजा गया है । इस बीच जनता दल (यू) के विधायक अमरनाथ गामी ने कहा कि समय रहते चेत जाते तो यह बीमारी इतनी विकराल रूप नहीं लेती ।

बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने भी राजग की सरकार पर घोर लापरवाही, कुव्यवस्था , महामारी को लेकर मुख्यमंत्री की असंवेदनशील, अमानवीय अप्रोच, और , लचर तथा भ्रष्ट व्यवस्था, स्वास्थ्य मंत्री के ग़ैर-ज़िम्मेदाराना व्यवहार एवं भ्रष्ट आचरण का आरोप लगाते हुए कहा कि इसकी वजह से इस बीमारी ने विकराल रूप ले लिया । मुजफ्फरपुर के भाजपा सांसद अजय निषाद ने कहा कि इस बीमारी की असली वजह 4जी यानी गर्मी, गांव, गरीब, गंदगी है क्योंकि ‘ज्यादातर मरीज गरीब तबके से हैं, उनके रहन-सहन के स्तर में गिरावट है ।

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