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चिदंबरम के सपोर्ट में शशि थरूर ने यूज किया ऐसा शब्द, लोग डिक्शनरी लेकर बैठ गए

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दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने आईएनएक्स मीडिया डील मामले में पी. चिदंबरम को 26 अगस्त तक की सीबीआई रिमांड पर भेज दिया है। स्पेशल जज अजय कुमार कुहार ने चिदंबरम के वकील और उनके परिवार के सदस्यों से रोजाना आधे घंटे मिलने की अनुमति दे दी है।

चिदंबरम को बुधवार की रात गिरफ्तार करने के बाद सीबीआई ने आज उन्हें कोर्ट में पेश किया। सीबीआई ने कोर्ट ने पांच दिनों की रिमांड की मांग की थी। सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से आईएनएक्स मीडिया डील मामले की जानकारी कोर्ट को दी।

इस बीच बताते चले कांग्रेस   नेता शशि थरूर  एक बार फिर अपनी अंग्रेजी के भारी भरकम शब्दों के कारण चर्चा में हैं। आईएनएक्स मीडिया मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम   की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थन में सामने आए शशि थरूर ने ट्वीट किया था. शशि थरूर ने ट्विटर पर लिखा, ‘यह आपको चरित्र की ताकत है कि आप उत्पीड़न और चरित्र हनन के बीच साहस और आत्मविश्वास के साथ खड़े हैं. मुझे यकीन है कि अंत में न्याय होगा। तब तक हमें द्वेष से भरे कुछ लोगों को षडयंत्रों को चलाते देखना होगा।”

ट्विटर पर किए अपने इस ट्वीट में शशि थरूर ने ‘शादनफ्रेडे’ शब्द का इस्तेमाल किया है। सोशल मीडिया पर शशि थरूर को फॉलो करने वाले यूजर्स अब इस जटिल शब्द में फंस गए हैं. ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी के अनुसार शादनफ्रेडे जर्मन मूल का शब्द है। इस शब्द का मतलब होता है ‘किसी दूसरे व्यक्ति के दुर्भाग्य पर किसी व्यक्ति द्वारा आनंदित होना।

कांग्रेस नेता शशि थरूर के इस ट्वीट के बाद यूजर्स ने उनके भारी भरकम अंग्रेजी के शब्द के लिए उन्हें ट्वीट करना शुरू कर दिया है।

 

वही इस बीच बताते चले चिदंबरम की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि इस मामले के सह-अभियुक्त कार्ति चिदंबरम को नियमित जमानत मिली। चार्टर्ड अकाउंटेंट भास्कर रमन को अग्रिम जमानत मिली है। पीटर मुखर्जी और इंद्राणी मुखर्जी डिफॉल्ट जमानत पर हैं। उन्होंने कहा कि चार्जशीट का ड्राफ्ट तैयार है और जांच भी पूरी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि फॉरेन इंवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड की स्वीकृति भारत सरकार के छह सचिवों के जरिये दी जाती है लेकिन उनमें से कोई गिरफ्तार नहीं किया गया। इसमें दस्तावेजी साक्ष्य हैं। सचिवों ने वित्त मंत्री से अनुशंसा की और उन्होंने इसकी स्वीकृति दे दी। एफआईआर दस साल के बाद दर्ज की गई।

सिब्बल ने कहा कि चिदंबरम से केवल एक दिन पूछताछ की गई। आप उन्हें दोबारा बुला सकते हैं। वे पूछताछ से कभी नहीं भागे हैं। अगर सीबीआई कहती है कि कुछ हुआ है तो ये परम सत्य नहीं है। ये व्यक्तिगत स्वतंत्रता का विषय है। सिब्बल ने कहा कि 6 जून, 2018 को पूछताछ का रिकॉर्ड मंगाकर देखा जाए कि क्या चिदंबरम सवालों से भागे हैं।

सिब्बल ने कहा कि कल रात सीबीआई ने कहा कि वे पूछताछ करना चाहते हैं लेकिन उन्होंने आज 12 बजे दोपहर तक कोई पूछताछ नहीं की। सीबीआई ने चिदंबरम से केवल 12 सवाल पूछे। अब तक उन्हें ये जानना चाहिए था कि क्या पूछना है? सवाल ही तैयार नहीं थे। जिन 12 सवालों को सीबीआई ने पूछा उनका चिदंबरम से कोई लेना-देना ही नहीं था। वे कोर्ट के रिकॉर्ड में हैं, जिनका जवाब वे पहले ही दे चुके हैं। वे पत्र लिखकर उन दस्तावेजों को मांग सकते थे लेकिन उन्होने ऐसा नहीं किया। जब हाईकोर्ट के जज ने 7 महीने तक फैसले को सुरक्षित रखा तब क्या निरोधात्मक सुरक्षा थी, जो हमने मांगी थी। उन्होंने कहा कि पुलिस रिमांड अपवाद है, कोई नियम नहीं। गिरफ्तारी के लिए मजबूत दावा चाहिए। सिब्बल ने कहा कि चिदंबरम के साथ जिस तरीके से पेश आया जा रहा है, वो आपत्तिजनक है। जो केस डायरी में लिखा है, वो केस का साक्ष्य नहीं है। इसे साक्ष्य से कोई लेना-देना नहीं है बल्कि वजह कुछ और है।

सिब्बल के बाद चिदंबरम की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि गिरफ्तारी अपने आप नहीं हो सकती है। ये अपवादस्वरुप हो सकती है। उन्होंने कहा कि पूरा मामला केस डायरी और इंद्राणी मुखर्जी के बयान के आधार पर है। 2018 में जब इंद्राणी मुखर्जी ने बयान दर्ज कराया तब उसके चार महीने के बाद चिदंबरम को बुलाया गया। चिदंबरम की गिरफ्तारी की वजह है कि इंद्राणी मुखर्जी सरकारी गवाह बन गई हैं। वो 2018 के बयान के आधार पर ही 2019 में सरकारी गवाह बन गईं। उन्होंने रिमांड की सीबीआई की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि सीबीआई की एक ही दलील है कि चिदंबरम सवालों का जवाब नहीं दे रहे हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले को पढ़ते हुए पूछा कि क्या सवालों से बचना गिरफ्तारी की वजह हो सकती है। पूछताछ देखने से ऐसा नहीं लगता कि चिदंबरम असहयोग कर रहे हैं। पुलिस हिरासत की वजह क्या है।

सुनवाई के दौरान पी चिदंबरम ने कहा कि वे कुछ कहना चाहते हैं। इसका तुषार मेहता ने विरोध किया। तब सिंघवी ने दिल्ली हाईकोर्ट का एक फैसला पढ़ा, जिसमें एक अभियुक्त को अपना प्रतिनिधित्व करने की इजाजत दी गई। तब मेहता ने कहा कि हम एक ऐसे अभियुक्त के साथ डील कर रहे हैं, जो सवालों का जवाब ही नहीं देता है, जांच में सहयोग नहीं करता है। मेहता ने कहा कि कार्ति चिदंबरम को गिरफ्तार किया गया था और उन्होंने नियमित जमानत पर छोड़ा गया। उसमें आगे जांच चल रही है। मेहता ने कहा कि जांच करना हमारा संवैधानिक अधिकार है। चिदंबरम से पूछताछ की जरूरत है। उन्होंने कहा कि चिदंबरम के साथ एक ही बार इसलिए पूछताछ की गई कि हम समझते थे कि निरोधात्मक सुरक्षा हटे बिना पूछताछ संभव नहीं है। ये निरोधात्मक सुरक्षा अगस्त 2019 में हटी है, जब दिल्ली हाईकोर्ट ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए चिदंबरम की अग्रिम जमानत खारिज की। एक जिम्मेदार जांचकर्ता कभी भी प्रश्नों की क्रॉनोलोजी का खुलासा नहीं करता है। जो भी सवाल पूछे जाते हैं वे लिखे जाते हैं। हमें हमारे पूछताछ के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है। यह देश के प्रति हमारा कर्तव्य है। उसके बाद कोर्ट ने चिदंबरम को बोलने की अनुमति दी।

तब चिदंबरम ने कहा कि 6 जून, 2018 को पूछे गए सवालों की ट्रांस्क्रिप्ट देखिए। उसमें कोई ऐसा प्रश्न नहीं है, जिसका जवाब नहीं दिया गया है। 50 लाख का सवाल कभी नहीं पूछा गया। हमसे केवल ये पूछा गया कि क्या विदेश में मेरा या मेरे बेटे का कोई खाता है।

दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद चिदबरम ने अपनी गिऱफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया । उस पर कल यानि 23 अगस्त को सुनवाई होनी है लेकिन उस याचिका का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि उन्हें सीबीआई गिरफ्तार कर चुकी है।
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