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माता के मेले में अग्निपरीक्षा दे रही थी महिला, दहकते अंगारों पर गिरी औंधे मुंह

कुछ बाते अक्सर सोचने पर मजबूर कर देती है. क्या ऐसा भी हो सता है आज की दुनिया में अभीकुछ खबरें ऐसी होती हैं, जिन पर भरोसा करना नामुमकिन सा  होता है. मगर जब सामने आती है तो होश तक उड़ जाते है. ऐसा ही कुछ आज हम आपको बताने जा रहे जिसे जानकर आपके रौंगटे खड़े हो जायेंगे.

ये दिल दहला देने वाला मामला पंजाब  के जालंधर से सामने आया है जहाँ जालंधर की काजी मंडी साउथ इंडियन पुअर वेलफेयर संघ की तरफ से 51 सालों से किया जा रहा मेला आयोजित किया जा रहा है। जहा 5 फीट चौड़ी और 20 फीट लंबी जलते कोयलों की पटरी पर चलकर श्रद्धालु आस्था की अग्नि परीक्षा देते हैं। इसी दौरान यहाँ एक बड़ा हादसा हो गया. जहा जालंधर में एक महिला धधकते अंगारों पर गिर गई। आस्था, विश्वास कहिए या भगवान्च का चमत्कार कि वह फिलहाल वो महिला सुरक्षित है।

मिली जानकारी के मुताबिक आपको बता दे कि यह महिला यहाँ अग्निपरीक्षा दे रही थी, जिस दौरान एक बड़ा हादसा होते-हाेते रह गया है। मौका था शहर की काजी मंडी में साउथ इंडियन पुअर वेलफेयर संघ की तरफ से आयोजित मां मारी अम्मा के मेले का, जहां हर साल हजारो संख्या में भक्त आते है सैकड़ों भक्त कोयलों पर चलते हैं। रविवार को भी सैकड़ों लोग दिल में आस्था का पानी लिए 20 फीट आग के दरिया पर चले। इन्हीं में से एक यह महिला भी थी। हालांकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, 2013 और 2016 में भी इस तरह अग्निपरीक्षा के बीच में ही लोगों के गिर जाने और झुलस जाने की कहानियां सामने आ चुकी हैं।

सूत्रों की जानकारी के अनुसार जालंधर में इस मेले के आयोजक पलनी स्वामी के मुताबिक पिछले विगत 51 सालो से यहां काजी मंडी स्थित मां मारी अम्मा के मंदिर में इस मेले को आयोजित किया जाता रहा है। इस मेले का सबसे बड़ा आकर्षण शोलों पर चलने का होता है। शुरू-शुरू में यहां सिर्फ दक्षिण भारतीय लोग ही अग्निपरीक्षा देते थे, लेकिन समय के अनुसार धीरे-धीरे आस्था इतनी बढ़ी जा रही है कि पंजाब व अन्य प्रदेशों के लोग भी इसमें रुचि दिखाने लगे हैं। 2018 में 600 पंजाबी, हरियाणवी, महाराष्ट्री, हिमाचली और गुजराती आग पर चलते नजर आए थे।

यह है मान्यता

पुरानी मान्यताओं और परंपराओं के मुताबिक देवी को खुश करने के लिए बच्चों को गोद में लेकर और अकेले अंगारों से भरे 20 फीट लंबे अग्निकुंड को पार करना होता है। ऐसा करना शुभ माना जाता है। इससे पहले सभी भक्तों को सात दिन तक व्रत रखना पड़ता है। लोग जब कोयलों पर चलते हैं तो उनकी आग बुझ चुकी होती है और राख बनने लगती है। इस अवस्था में कोयला कम हीट प्रोड्यूस करता है। चलने से पहले पैर भिगोए जाते हैं। जलते कोयलों और पैर के बीच राख और पानी एक कुशन का काम करते हैं, जिस वजह से पैर नहीं जलते। शर्त है कि कोयलों पर लगातार चलते रहना है।

पहले भी हो चुके लोग अग्निपरीक्षा में नाकाम

इससे पहले भी कई बार हादसे होते रहे हैं। 2013 में मां-बेटी कोयलों पर गिरकर झुलसे थे, वहीं 2016 में पिता और बच्चा गिरे थे। 6 साल का कार्तिक अग्निपरीक्षा के दौरान जलते कोयले के अंगारों पर गिर गया था। पिता राजा ने उसे उठा रखा था। कोयलों पर गिर जाने से बच्चे के कान और पीठ झुलस गए थे। दैनिक भास्कर के फोटो जर्नलिस्ट ने इन दोनों को ढूंढकर अस्पताल पहुंचाया था। विधायक मनोरंजन कालिया ने बच्चे के इलाज के लिए मौके पर 10 हजार रुपए दिए थे।

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