लॉकडाउन में यूपी के ये परिवार हुए बेहाल, गेहूं की बालियों से पेट रहे थे पाल

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लॉकडाउन के निर्देश जारी होते ही लोग घरों में रहने को मजबूत हो गए। देखा जाए तो कुछ लोग इसको मजबूरी समझकर निर्देशों का उल्लंघन कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसे परिवार भी हैं, जो मजदूरी करके या मांगकर खाते थे लेकिन इन हालातों में वे घर पर भूंखो रहकर भी प्रधानमंत्री का समर्थन कररहे हैं। हम बात कर रहे हैं जनपद कानपुर देहात के रसूलाबाद विकास खंड क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत जोगिन डेरा की। यहां सपेरे प्रजाति के कई परिवार रहते हैं। जो प्रतिदिन कमाकर और भीख मांगकर खाने वाले हैं। लॉकडाउन की स्थिति में इन लोगों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई। ऐसे में इन लोगों के लिए जीवन यापन करना बहुत मुश्किल हो गया। जिन्हें पुलिस ने भोजन वितरित कर राहत दी।

दरअसल 21 दिन के लॉकडाउन की जैसे ही घोषणा हुई वैसे ही इन गरीबों की चिंताएं बढ़ गई। गेहूं की बाली को भूनकर अपने बच्चों को खिलाकर उनका पेट भरा। गरीबी व आर्थिक तंगी के चलते पूरा गांव परेशान दिखा। हालांकि तीन दिन तक इन्हे कोई मदद नहीं मिली। कोई भी प्रशासनिक अधिकारी व जनप्रतिनिधि ने इनकी सुध नहीं ली। यहां के रहने वाले कल्लो देवी, छक्कीलाल, शिखा देवी, दुर्वेश कुमार, पीतमनाथ, नायक नाथ ने बताया कि जब से 21 दिन का लॉकडॉउन से लागू हुआ है, तब से कोई भी जनप्रतिनिधि व अधिकारी उनकी सुध लेने नहीं आया। भूख के कारण उनका व उनके बच्चों का बुरा हाल है।

वहीं जब इस गांव का निरीक्षण किया तो ये हालात देख स्थानीय पुलिस प्रशासन को अवगत कराया गया। जिसके बाद रसूलाबाद पुलिस द्वारा तत्काल इस गांव में पहुंचकर इन गरीब परिवारों के बच्चों बुजुर्गो सहित सभी लोगों को भोजन वितरित कर राहत पहुंचाई।

थानाध्यक्ष रसूलाबाद तुलसीराम पांडेय ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान अनुपालन कराने के दौरान सड़क किनारे रहने वाले लौहपिटवा समुदाय के लोगों को भोजन दिया। इसके बाद यहां की जानकारी मिलने पर जोगिन डेरा गांव में भी लोगों को भोजन वितरित किया गया है।