SBI रिसर्च रिपोर्ट- इस साल 16 लाख नौकरियां और कम होंगी..बाकी सब चंगा सी..

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देश की आर्थिक स्थिति बेहद ही गंभीर होती जा रही है! वहीं आम जनता महंगाई की मार से त्रस्त है। इसी बीच रोजगार क्षेत्र से भी बुरी खबर आई है। वित्त वर्ष 2020 में नौकरियों में और भी कमी आने की उम्मीद है। ये वैसी नौकरियां हैं जो पे-रोल के आंकड़ों पर आधारित होती हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के एक रिसर्च नोट के अनुसार 2019-20 में नए पे-रोल के आधार पर 2018 की तुलना में 20 प्रतिशत नौकरियां कम हो सकती है। ईपीएफओ सितंबर 2017 के बाद से संशोधित पे-रोल डेटा जारी कर रहा है, जिसमें नौकरी छोड़ चुके हैं और फिर से नौकरी ज्वाइन किए लोगों को शामिल किया गया है। एसबीआई के मुख्य आर्थिक सलाहकार एस के घोष ने कहा कि ईपीएफओ डेटा सही तस्वीर नहीं दिखा सकता है।

मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ईपीएफओ के आंकड़ों से पता चलता है कि वित्त वर्ष 20 के लिए वार्षिक नए नामांकन 106.2 लाख करोड़ हो सकते हैं। वहीं एसबीआई रिसर्च टीम की गणना बताती है कि नए पे-रोल के आधार पर यह संख्या 73.9 लाख हो सकती है। बता दें कि पिछले वित्त वर्ष में कुल 89.7 लाख रोजगार के अवसर पैदा हुए थे। यह ईपीएफओ के 2018 में जारी आंकड़े से 21 प्रतिशत या 15.8 लाख कम हो सकती है। सरकार ने पहली बार ईपीएफओ, ईएसआईसी और एनपीएस के रिकॉर्ड का उपयोग करके अप्रैल 2017 से अप्रैल 2017 के लिए मासिक पे-रोल डेटा प्रकाशित करना शुरू किया था।

ईपीएफओ के आंकड़े में मुख्य रूप से कम वेतन वाली नौकरियां शामिल होती हैं जिनमें वेतन की अधिकत सीमा 15,000 रुपये मासिक है। रिपोर्ट में की गई गणना के अनुसार अप्रैल-अक्टूबर के दौरान शुद्ध रूप से ईपीएफओ के साथ 43.1 लाख नए अंशधारक जुड़े। सालाना आधार पर यह आंकड़ा 73.9 लाख बैठेगा।