बिहार अध्यक्ष बदलने के पीछे बीजेपी का डबल प्लान, एक साथ निपटेंगे ‘सुशील’ और सत्ता के साझीदार ?

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बिहार बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा के साथ हीं अध्यक्ष पद के लिए तल रहे सारे कयासों पर विराम लग गया है. नित्यानंद राय की जगह संजय जायसवाल बिहार बीजेपी के नए अध्यक्ष नियुक्त कर दिए गए हैं. लेकिन यह बड़ा सवाल कि केंद्रीय नेतृत्व संजय जायसवाल को अध्यक्ष बनाकर बिहार में साधना क्या चाहता है?

एक ऐसे वक्त में, जब पार्टी सीधे-सीधे नीतीश के नेतृत्व पर दो धडों में बंटती दिखाई दे रही हो…. बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के द्वारा लगातार सुशील मोदी पर निशाना साधा जा रहा है..जब से उन्होंने नीतीश को कप्तान घोषित करने वाला ट्वीट किया है. बयान के घमासान के बीच काफी सोच समझकर संजय जायसवाल को प्रदेश अध्यक्ष का कमान सौंप देने के पीछे कुछ न कुछ माजरा तो जरूर है….

संजय जायसवाल के पिता मदन जायसवाल का जनसंघ से पुराना रिश्ता रहा है. संजय जायसवाल खुद 2009 से लगातार बेतिया से सांसद हैं. कहा जाता रहा है कि इनका सुशील मोदी से करीबी रिश्ता रहा है और उन्हीं के वर्ग से आते हैं…तो क्या फिर सुशील मोदी के खेमे ने बाजी मार ली…इसे समझना होगा,इस बार कुछ वैसा नहीं है,केंद्रीय नेतृत्व द्वारा नित्यानंद राय के बाद संजय जायसवाल को अध्यक्ष बनाकर यह साबित करना है कि बीजेपी सिर्फ सवर्णों की पार्टी नहीं है.यानि लगातार दूसरी बार पिछड़े के हाथ में प्रदेश की कमान देकर पार्टी पर लगे सवर्णो के ठप्पे से मुक्ति दिलाना भी है.

मतलब साफ है कि संजय जायसवाल के तौर पर प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति का सीधा निशाना सत्ता का साझीदार भी है. जी हां हम बात कर रहे हैं बिहार में सत्ता के सहयोगी जेडीयू की. जरा याद कीजिए कैसे लोकसभा चुनाव के दौरान टिकट बंटवारे में पिछड़ों की पार्टी होने में जेडीयू ने बाजी मार ली थी और बड़े हीं तरीके से अपरोक्ष तौर पर भाजपा पर सवर्णो की पार्टी होने का राजनीतिक ठप्पा लग गया था. संजय जायसवाल के अध्यक्ष बनने के बाद सबसे बड़ी कोशिश होगी कि विधानसभा में सवर्णो और पिछड़ों के बीच संतुलन कायम करते हुए जेडीयू को औकात में लाना. पिछड़ों के सहारे चुनावी राजनीत करने वाली जेडीयू के लिए अपनी रणनीति पर दोबारा विचार करना होगा.

अब बात कर लेते हैं सुशील मोदी की…..संजय जायसवाल का अध्यक्ष के तौर पर नाम सुनते हीं कुछ राजनीतिक विश्लेषकों ने बताया कि मोदी खेमे ने फिर से बाजी मार ली.लेकिन पार्टी के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो संजय जायसवाल को अध्यक्ष बनाकर सुशील मोदी को हीं साधने की तैयारी कर ली गई है.सर्व विदित है कि वर्तमान में सुशील मोदी बिहार बीजेपी के सबसे बड़े चेहरे के तौर पर स्थापित नेता हैं.लेकिन दिल्ली के लोगों से इनका दिल नहीं मिल रहा. उसका परिणाम भी लगातार देखने को मिल रहा है.सुशील मोदी जैसा नेता कुछ ट्वीट करता हो और कई वरिष्ठ नेता उसे तत्काल खारिज कर देता हो…यह बात सबकुछ साबित कर देता है,इसे समझना होगा..सुशील मोदी के राजनीतिक आभा मंडल को धूमिल करने का प्रयास शुरू कर दिया गया है.

इस बीच सुशील मोदी के हीं वर्ग के एक तेजतर्रार और काबिल नेता को प्रदेश अध्यक्ष का कमान सौंप कर दिल्ली ने भी अपनी मंशा जाहिर कर दी है कि अब किसी एक का वर्चस्व का दिन लदने वाला है.गौरतलब है कि बीजेपी को वैश्य की पार्टी भी कहा जाता रहा है. बिहार में वैश्य नेता के तौर पर सुशील मोदी की एक अलग पहचान है.संजय जायसवाल का अध्यक्ष बनना या फिर बनाया जाना कहीं मोदी की यह पहचान छीनने की कवायद तो नहीं?