RS सोढ़ी ने बोले- जजों का इस तरह मीडिया के सामने आना गंभीर है, चले अवमानना की प्रक्रिया

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के चार जजों द्वारा 12 जनवरी को प्रेस वार्ता आयोजित कर न्यायपालिका प्रशासन की भीतरी कमियोंं को उजागर कर दिया है. न्यायाधीशों के इस तरह से देश की सर्वोच्च न्यायालय की कार्यप्रणाली पर सार्वजनिक तौर पर सवाल खड़े करने को लेकर अब विवाद शुरू हो गया है. मामले को लेकर बहस शुरू हो गई है कि जजों का ये कदम सही था या गलत. राजनीतिक दलों के दिग्गज नेताओं से लेकर पूर्व सीजेआई तक इस मुद्दे पर बात कर रहे हैं. इसी क्रम में सुप्रीम कोर्ट से रिटायर जज आरएस सोढ़ी नेे मीडिया से वार्ता करने वाले जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस कुरियन जोसेफ और जस्टिस मदन बी लोकुर की निंदा की है.

रिटायर्ड जज आरएस सोढ़ी ने जजों की मीडिया से बातचीत पर कहा, ‘मामला कोई मायने नहीं रखता. उनकी शिकायत प्रशासनिक मामलों को लेकर है. वे 4 हैं, उनके अलावा 23 और हैं. ये 4 मिलकर चीफ जस्टिस की गलत छवि बना रहे हैं. ये अपरिपक्व और बचकाना है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘मुझे ऐसा लगता है कि इन चारों पर अभियोग लगाया जाना चाहिए. उन्हें अब बैठकर फैसले देने का कोई अधिकार नहीं है. यह ट्रेड यूनियननुमा व्यवहार गलत है. लोकतंत्र पर खतरा उनके बताने की बात नहीं है, हमारे यहां संसद, कोर्ट और पुलिस काम कर रहे हैं.’

‘सुप्रीम कोर्ट छोड़ दें जज’

जस्टिस सोढ़ी ने सवाल किया है, ‘प्रेस कॉन्फ्रेंस करके आपने क्या किया है? क्या आप इस स्तर तक आ सकते हैं? अगर चारों जज कहते, तो CJI दीपक मिश्रा पर महाभियोग चलाने के बारे में फैसला लिया जा सकता था, मैं कहता हूं कि आपको सुप्रीम कोर्ट छोड़ देना चाहिए.’

‘जजों के खिलाफ चले अवमानना की प्रक्रिया’

जस्टिस आरएस सोढ़ी का कहना है कि चारों जजों के खिलाफ अवमानना की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए. जस्टिस सोढ़ी का चारों जजों से सवाल है, ‘इस बारे में वो क्या सोचते हैं? क्या सिर्फ वे ही लोग समर्थ हैं और क्या बाकियों में कोई योग्यता नहीं है?’

CJI से आज हो सकती है जजों की मुलाकात

सर्वोच्च न्यायालय के 4 शीर्ष न्यायाधीशों की ओर से सर्वोच्च न्यायालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जाने से उपजे संकट के बीच प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा बगावती तेवर अपनाने वाले न्यायाधीशों से आज मुलाकात कर सकते हैं, इनमें से दो न्यायाधीशों ने शनिवार को मुद्दा सुलझाने की ओर इशारा भी किया है.

कोर्ट के अंदर ही सुलझेगा विवाद

मुकदमों के ‘चुनिंदा’ तरीके से आवंटन और कुछ न्यायिक फैसलों के विरुद्ध चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के खिलाफ एक तरह से बगावत का कदम उठाने वाले सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठतम जजों में से एक न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ ने भरोसा जताया है कि उन्होंने जो मुद्दे उठाए हैं, उस मुद्दे को कोर्ट के अंदर ही सुलझाया जाएगा.

उन्होंने कहा कि इस विवाद को बाहर से सुलझाने की जरूरत नहीं है. हालांकि उन्होंने फिर दोहराया कि सुप्रीम कोर्ट में सुधार की जरूरत है. न्यायमूर्ति जोसेफ ने कहा, ‘किसी भी प्रकार का संवैधानिक संकट नहीं है और केवल प्रकिया में समस्या है, जिसे सही कर लिया जाएगा.’ उन्होंने कहा कि चार न्यायाधीशों ने शुक्रवार को जारी पत्र में सबकुछ लिख दिया था और इस पत्र को उन्होंने एक माह पहले ही न्यायमूर्ति मिश्रा को भेज दिया था.

 

 

बार काउंसिल की पहल  

बार काउंसिल ऑफ इंडिया की शनिवार को दिल्ली में बैठक हुई. बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने पांच वरिष्ठतम न्यायाधीशों को छोड़कर उच्चतम न्यायालय के अन्य सभी न्यायाधीशों के साथ मौजूदा संकट पर चर्चा के लिए सात सदस्यीय टीम का गठन किया है. BCI के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि टीम अन्य न्यायाधीशों की राय लेगी.

उन्होंने कहा कि इस तरह के मुद्दों को सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए. साथ ही BCI ने कहा कि रोस्टर या मामलों के आवंटन को लेकर न्यायाधीशों के बीच चाहे जो भी मतभेद हो, सार्वजनिक तौर पर राय जाहिर किए बिना अंदरूनी व्यवस्था के जरिए उसका समाधान किया जाना चाहिए.

चार जजों ने सीजेआई के खिलाफ की थी बगावत

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति चेलमेश्वर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ ने शुक्रवार को प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ बगावत कर दी थी. उन्होंने मामलों को आवंटित करने समेत कई समस्याएं गिनाईं थीं.