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क्या सच में 200 टन सोना चोरी छुपे भेजा गया विदेश? जानिए इस मामले में पूरी सच्चाई 

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मुंबई । भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को एक बयान जारी करते हुए कहा है कि साल 2014 के बाद से ही देश के बाहर सोना नहीं भेजा गया है। आरबीआई का यह बयान तब आया है, जब कुछ मीडिया सेक्टर के हवाले से कहा गया कि साल 2014 में केंद्रीय बैंक ने अपनी गोल्ड होल्डिंग्स का एक हिस्सा विदेश में शिफ्ट कर दिया है। कांग्रेस ने भी कहा था कि आरबीआई ने लगभग 200 टन सोना रिजर्व को विदेशों में गिरवी रख दिया है।

आरबीआई के बयान के अनुसार

मीडिया रिपोर्ट्स तथ्यात्मक रूप से गलत हैं। हालांकि दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की ओर से गोल्ड स्टॉक को दूसरे देशों के सेंट्रल बैंक में सुरक्षित रखे जाने की प्रक्रिया अपनाई जाती रही है। बैंक ऑफ इंग्लैंड और स्विट्जरलैंड में भी गोल्ड स्टॉक्स को सुरक्षित कस्टडी में रखना आम बात है। लेकिन भारतीय केंद्रीय बैंक ने साल 2014 में या इसके बाद भारत से किसी भी दूसरे देशों में कोई गोल्ड शिफ्ट नहीं किया गया है।

बताते चले  कांग्रेस पार्टी ने ट्विटर पर एक रिपोर्ट ट्वीट किया गया है।  जिसमें 2014 में आरबीआई का 200 टन सोना स्विट्जरलैंड भेजने की बात कही गयी है।. पार्टी ने रिपोर्ट टैग करते हुए कहा था कि क्या मोदी सरकार ने गुपचुप तरीके से आरबीआई का 200 टन सोना 2014 में स्विट्जरलैंड भेजा।

बताते चले  दिल्ली दक्षिण लोकसभा से चुनाव लड़ रहे नवनीत चतुर्वेदी ने सरकार और रिजर्व बैंक पर बड़े गंभीर आरोप लगाए थे कि   रिजर्व बैंक का 200 टन सोना मोदी सरकार ने आते ही चोरी छुपे विदेश भेज दिया है चतुर्वेदी ने कहा बैंक ऑफ़ इंटरनेशनल सेटेलमेंट्स (बीआईएस) जो स्विजरलैंड में है। उसमें भेजा गया है। यह सोना विदेश में तब भेजा जाता है। जब वहां से कर्ज़ लेना हो, डॉलर लेना हो या क्षमता से अधिक नोट छापना हो।

क्या मोदी सरकार ने 2014 में सत्ता संभालते ही देश का 200 टन सोना चोरी छिपे स्विट्ज़रलैंड भेजा !

चतुर्वेदी ने आरोप लगाया है, कि 1991 में जब देश आर्थिक संकट से गुजर रहा था। तब 45 टन सोना बैंक ऑफ़ इंग्लैंड में गिरवी रखा गया था। 2015 में मोदी सरकार ने एक बार फिर देश का सोना विदेश के बैंक आप इंग्लैंड और बैंक आफ इंटरनेशनल सेटलमेंट में रखा है। इस तथ्य को मोदी सरकार ने क्यों छुपाया है।

चतुर्वेदी का दावा है कि 2011 से 2015 के बीच जारी आरबीआई की ऑडिट रिपोर्ट से जाहिर होता है कि 2014 और 2015 के बीच में कुछ न कुछ तो गड़बड़ हुआ है।

वह बताते हैं कि 30 जून 2011 की आरबीआई की सालाना बैलेंस शीट में इस 200 टन सोने का जिक्र है और कहा गया है कि यह भारत में है। 30 जून 2014 के जारी बैलेंस शीट में भी इसका जिक्र है।

क्या मोदी सरकार ने 2014 में सत्ता संभालते ही देश का 200 टन सोना चोरी छिपे स्विट्ज़रलैंड भेजा !
क्या मोदी सरकार ने 2014 में सत्ता संभालते ही देश का 200 टन सोना चोरी छिपे स्विट्ज़रलैंड भेजा !

लेकिन 2015 की सालाना बैलेंस शीट में इस सोने का जिक्र नहीं है। बल्कि कहा गया है कि सोने का एक हिस्सा स्विट्ज़रलैंड की बैंक ऑफ इंटरनेशनल सैटलमेंट में रखा गया है। यानी मई 2014 और जून 2015 के बीच चुपके से 200 टन सोना विदेश भेज दिया गया।

क्या मोदी सरकार ने 2014 में सत्ता संभालते ही देश का 200 टन सोना चोरी छिपे स्विट्ज़रलैंड भेजा !

चतुर्वेदी कहते हैं कि, “देश का सोना अगर विदेश भेजा जा रहा है, तो इस बात को सार्वजनिक किया जाना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जाहिर है सरकार कुछ न कुछ तो छिपा ही रही है।”

 

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