राज ठाकरे ने खुद को ‘हिंदू हृदय सम्राट’ बोलने से लोगों को किया मना, जान लीजिए वजह

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मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने पार्टी के पदाधिकारियों से कहा है कि मुझे ‘हिंदू हृदय सम्राट’ संबोधित न किया जाए। सोमवार को राज ने पार्टी की ओर से 9 फरवरी को राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के समर्थन में निकाले जाने वाले मोर्चे की तैयारी को लेकर बैठक की। राज बांद्रा के रंगशारदा होटल में आयोजित बैठक में आने के बाद महज 10 मिनट में चले गए। राज ने कहा कि मेरी हिंदू हृदय सम्राट तथा शिवसेना प्रमुख बालासाहब ठाकरे से तुलना नहीं हो सकती। इसलिए मुझे हिंदू हृदय सम्राट की संज्ञा न दी जाए। उन्होंने कहा कि पार्टी के नए झंडे में छत्रपति शिवाजी महाराज की राजमुद्रा है। इसलिए कहीं पर भी झंडे का अनादर नहीं होना चाहिए। मनसे के वरिष्ठ नेता पूर्व विधायक बाला नांदगावकर ने कहा कि राज ने विन्रमता से कहा है कि मुझे कोई हिंदू हृदय सम्राट संबोधित न करे।

नांदगावकर ने कहा कि पार्टी का झंडा बदलने के बाद से कार्यकर्ता और पदाधिकारी पोस्टर पर राज को हिंदू हृदय सम्राट संबोधित कर रहे थे। चूंकि राज के मन में बालासाहब के प्रति बहुत सम्मान हैं, इसलिए राज को यह बात पंसद नहीं आई। नांदगावकर ने कहा कि बैठक में 9 फरवरी को आयोजित किए जाने वाले मोर्चे की रुपरेखा तैयार की गई। मोर्चे की शुरुआत कहां से होगी यह अभी तय नहीं है। पुलिस से अनुमति के बाद जगह तय की जाएगी। लेकिन यह तय है कि मोर्चे का समापन आजाद मैदान में होगा। नांदगावकर ने कहा कि मोर्चे में जो सभी देश प्रेमी, चाहे वे किसी भी दल के हैं शामिल हो सकते हैं। इस मोर्चे में गल्ली से लेकर दिल्ली तक का कोई भी शामिल हो सकता है।