बिना तैयारी का लॉकडाउन हुआ घातक, दिल्ली से मुरैना पैदल जा रहे मजदूर ने तोड़ा दम

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बिना किसी तैयारी के किया गया 21 दिन का लॉकडाउन अब घातक होता जा रहा है। इस लॉकडाउन के चलते बड़े शहरों से अपने गांव की ओर पलायन कर रहे गरीबों कामगारों की मौत का सिलसिला शुरू हो गया है।

लॉकडाउन के बाद मुंबई से गुजरात पैदल जा रहे चार मजदूरों की सड़क हादसे में मौत के बाद अब दिल्ली से मुरैना पैदल जा रहे एक मजदूर की भूख और प्यास से मौत का मामला सामने आया है। मृतक शख़्स का नाम रणवीर बताया जा रहा है, जो मध्य प्रदेश के मुरैना का रहने वाला था और दिल्ली में काम करता था।

ये रणवीर हैं. राजा के फरमान के बाद अपने ही देश में बिना कोरोना संक्रमण के भूख से मर गए. ये देश के दिल दिल्ली में पसीना…

Gepostet von Santosh Pathak am Samstag, 28. März 2020

वरिष्ठ पत्रकार संतोष पाठक ने इस मामले की जानकारी अपने फेसबुक पोस्ट के ज़रिए शेयर की है। उन्होंने बताया कि रणवीर दिल्ली में कमाने आए थे, लेकिन लॉकडाउन के बाद जब उनके सामने भुखमरी का संकट खड़ा हुआ तो वो दिल्ली से अपने घर मुरैना के लिए पैदल ही निकाल पड़े। बता दें कि दिल्ली से मुरैना की दूरी तकरीबन 350 किलोमीटर है।

भुखमरी से बचने के लिए रणवीर पैदल ही इतना लंबे सफर पर निकल तो पड़े लेकिन वो अपने घर तक नहीं पहुंच सके। रास्ते की थकन और भूख – प्यास के आगे उनकी हिम्मत ने दम तोड़ दिया और वो ज़िन्दगी की जंग हार गए। रणवीर की मौत ने एक बात फिर से बिना तैयारी के पीएम मोदी के लॉकडाउन के फैसले को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

सरकार की बदइंतेज़ामी पर निशाना साधते हुए पत्रकार संतोष पाठक ने लिखा, “ये रणवीर हैं। राजा के फरमान के बाद अपने ही देश में बिना कोरोना संक्रमण के भूख से मर गए। ये देश के दिल दिल्ली में पसीना बहाकर विकास का पहिया घुमा रहे थे, मुसीबत के दौर में दिल्ली ने इसे भगा दिया। ये पैदल ही दिल्ली से मुरैना MP के लिए निकले थे और चलते- चलते मर गए। ऐसे न जाने कितने मजदूर भूख और प्यास के बीच पैदल चलते जंदगी का रण हार जाएंगे। इंसानियत भूल चुके भक्त कुछ भी तर्क दें, लेकिन सरकार अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। चूक तो हुई है..समय रहते सुधार लीजिये !”