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पूरे बिहार की एक ही गुहार, इस ‘चमकी’ का कुछ करो सरकार

बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर में एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम यानि चमकी बुखार ने मौत का तांडव मचा रखा है, इस बुखार से मरने वालों की संख्या बढ़कर 100 पहुंच गई है. जिले के SKMCH और केजरीवाल अस्पताल में 375 बच्चे अभी भी एडमिट हैं.अस्पताल में कई तरह की कमी की रिपोर्ट है. अररिया, मोतिहारी समेत और कई जिलों से AES के केस की खबर है पर अस्पतालों  की सुविधा पर संदेह है.

जनता त्राहिमाम कर रही है,सरकार कटघरे में है,अस्पताल प्रशासन भी सवालों के घेरे में है पर सूबे की नीतीश सरकार सिर्फ मौत का तांडव देख रही है….पटना से दिल्ली तक के नेताजी और मंत्रीगण दौरा कर मातमपुर्सी कर सहानभूति जता रहे हैं.

ऐसा नहीं है कि,मुज़फ़्फ़रपुर में इस बुखार ने पहली बार दस्तक दी है. यहां के लोगों  के लिए यह कोई नई बीमारी नहीं है. 1995 से ही इस रहस्यमय बीमारी यहां के बच्चों को अपना शिकार बनाते आई है लेकिन सरकार अबतक रिसर्च ही कर रही है.

हर साल मई और जून में विभिन्न कस्बे इस बीमारी की चपेट में आते हैं और तब बच्चों के मरने का सिलसिला शुरू हो जाता है. बीमारी जब आती है तो सरकार सक्रिय होती है और मामला शांत होते सरकार की सक्रियता खत्म हो जाती है. अगर समय रहते सरकार सक्रियता से इस बीमारी का इलाज खोज लेती तो आज मौत का ताँडव नहीं मचता.

सरकार को इस बीमारी को और गम्भीरता से लेना चाहिये और समय रहते इसका हल निकालना चाहिए ताकि लोगों को मरने से बचाया जा सके. नीतीश सरकार के कामकाज के लोग कायल हैं और उम्मीद भी है कि इसका हल निकलेगा  लेकिन इस वक़्त लोग यही गुहार लगा रहें कि इस बुखार का कुछ करो सरकार.

ये लेख वरिष्ठ टीवी पत्रकार विनय कुमार के फेसबुक पेज से साभार लिया गया है। ये लेखक के निजी विचार हैं।

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