PK अब बनना चाहते हैं बिहार का केजरीवाल, क्या मंसूबे होंगे कामयाब ?

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अरविंद केजरीवाल की दिल्ली की सियासत में तीसरी बार ताजपोशी के बाद 18 फरवरी मंगलवार को प्रशांत किशोर पटना पहुंचेंगे. PK अपनी भविष्य की राजनीति पर वहां विस्तार से बात करेंगे, लेकिन इससे पहले उन्होंने साफ कह दिया है कि बिहार में वो राजनीतिक मैनेजर के तौर पर काम नहीं करेंगे. बल्कि एक राजनीतिक कार्यकर्ता के तौर काम करेंगे.

PK भले ही अपनी आगे की राजनीतिक दशा और दिशा पर पटना में विस्तार से खुलासा करेंगे, लेकिन एक बात साफ कर दी है कि बिहार में वो एक मैनेजर के तौर पर किसी के सारथी नहीं बनेंगे बल्कि एक राजनीतिक योद्धा के तौर पर मैदान में उतरकर मुकाबला करेंगे. PK ने कहा कि मेरा जन्म बिहार में हुआ है ऐसे में मेरा यहां से गहरा नाता है. हमने देश भर में भले ही राजनीतिक मैनेजर के तौर पर काम किया हो, लेकिन बिहार में मैंने एक पॉलिटिक्ल एक्टिविस्ट के तौर पर अपना सियासी सफर शुरू किया था.

PK ने यह भी कहा कि पिछले 6 सालों में उत्तर प्रदेश को छोड़कर मैं रणनीतिकार के रूप कोई भी चुनाव नहीं हारा हूं. इससे एक बात साफ है कि मैं चुनाव हारने के लिए नहीं बल्कि जीतने के लिए उतरता हूं. उन्होंने कहा कि मैं राजनीति से दूर नहीं जाऊंगा बल्कि राजनीतिक सक्रियता को अब और आगे बढ़ाने जा रहा हूं. बिहार के लिए हमने जो भी खासा प्लान बना रखा है, वो आने वाले दो तीन महीनों में लोगों को साफ दिखाई देगा. PK की पूरी कोशिश केजरीवाल फॉर्मूले को लागू करने की होगी. वो बदलाव और नई राजनीति को अपना हथियार बनाएंगे. जेडीयू के उपाध्यक्ष रहते ही I-PAC ऐसे लाखों युवाओं का प्रोफाइल तैयार कर चुकी है जो सक्रिय राजनीति में आना चाहते हैं. अब नए मिशन में ये डाटाबेस काम आने वाला है.

PK  चुनावी राजनीति में नौसिखियां हैं. पोल स्ट्रैटेजिस्ट के करियर से बाहर निकल कर वोट के दंगल में कूदना आसान नहीं है. नीतीश और लालू इसके महारथी हैं. एक और तथ्य PK के विरोध में जाती है. बिहार की राजनीति में जातीय फैक्टर. इसका जवाब भी PK समर्थक बिहार के राजनीतिक इतिहास में ही खोजते हैं जब JP के परिवर्तन लहर में जातीयता गौण हो गई थी. PK का गांव रोहतास के कोनार गांव में है. लेकिन उनके पिता श्रीकांत पांडेय बक्सर में बस गए जहां से PK ने स्कूल की पढ़ाई पूरी की. PK ब्राह्मण जाति से हैं. इस बिना पर जेडीयू के भीतर भी खलबली मची थी जब उन्हें नीतीश का उत्तराधिकारी बताया जाने लगा. दरअसल लालू – नीतीश – पासवान सामाजिक न्याय वाली धारा से उभरे हुए नेता हैं. इस उभार ने बिहार की शीर्ष सत्ता से सवर्णों को दूर कर दिया.

बहरहाल, ऐसी परिस्थितियों में प्रशांत किशोर युवा शक्ति के सहारे बिहार का केजरीवाल बनने की कोशिश करेंगे. गौरतलब है कि अरविंद केजरीवाल ने शपथ के बाद दिल्ली के रामलीला मैदान से यूपी बिहार को सीधा संदेश दिया. उन्होंने कहा कि गांव फोन कर बता देना कि उनका बेटा सीएम बन गया है. केजरीवाल को पता है कि दिल्ली में बिहार और यूपी के लोग भारी संख्या में बसते हैं. बिहार के कोई गांव ऐसा नहीं होगा जहां के 10 लोग दिल्ली में न रहते हों, तो कनेक्शन समझिए. जब अलग-अलग सामाजिक पृष्ठभूमि के लोग दिल्ली आकर केजरीवाल को नेता बना सकते हैं तो बिहार में ऐसी संभावना क्यों नहीं बन सकती?