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ये तस्वीर है हमारे देश का ‘विकास’, गड्‌ढा खोदकर प्यास बुझाने को मजबूर हैं 100 गांव

People are forced to drink water by digging the pit in more than 100 villages in Gariaband of Chhattisgarh

इन दिनों छत्तीसगढ़ भीषण गर्मी की चपेट में है। यहाँ का तापमान अभी से इस कदर बढ़ा गया है| लोगो को बेहद परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है| सबसे बड़ी समस्या है यहाँ से लोलो के लिए सबसे बड़ी चिंता का   विषय बना हुआ है पानी। जिसके कारण नदियां, हैंडपंप और नल सूखने लगे हैं। गर्मी का प्रकोप इस कदर है प्रदेश के कई इलाकों में पारा अभी से 40 से 42 डिग्री पर पहुंच गया है। प्रदेश में 45 प्रतिशत वन क्षेत्र है, बावजूद इसके कुछ इलाकों में हालात इतने बदतर हो गए हैं कि पीने के लिए पानी टैंकरों से सप्लाई करना पड़ रहा है। ऐसे में गरियाबंद जिले के देवभोग और मैनपुर विकासखंड में लोगों को जमीन में गड्‌ढा खोदकर (झरिया से) पानी पीने को मजबूर कर दिया है। खास बात कि यह सिलसिला पिछले एक माह से जारी है।

पुरानी कहावत है कि ग्रामीण तकलीफ झेलना जानते हैं, लेकिन बोलना नहीं जानते| छत्तीसगढ़ में लोगो की  हालात देखें तो यह बात सही साबित होती है|

इस गाँव में 1300 की आबादी, 8 हैंडपंप, पानी सिर्फ एक से, वो भी थोड़ी देर के लिए

मैनपुर और देवभोग विकासखंड के 100 से ज्यादा गांव पानी की किल्लत से बुरी तरह त्रस्त हैं। गर्मी के प्रकोप से हैंडपंपों से पानी निकलना बंद हो गया है। जिनसे आ भी रहा है तो भी थोड़ी देर के लिए। उनते पानी में लोगो की प्यास भी नहीं भुझ पाती।

देवभोग के निष्ठीगुडा पंचायत क्षेत्र में ग्रामीण झिरिया का पानी पीने पीने को मजबूर है| शासन की ओर से निष्ठीगुडा में समस्या के निस्तारण की पहल भी की गई, लेकिन सारे इंतजाम नाकाफी ही साबित हुए हैं अब तक। निष्ठीगुडा की बात करें तो इस गांव की आबादी 1300 के लगभग है। गांव में 8 हैंडपंप लगे हैं, लेकिन सूख चुके हैं। कुछ का पानी पीने लायक तक नहीं रह गया है। महज एक हैंडपंप से ही पानी निकल रहा है। वह भी कुछ देर चलने के बाद बंद हो जाता है।

गांव में नल जल योजना लागू है, लेकिन लो वॉल्टेज के कारण वह भी बंद पड़ी है। इसके चलते ग्रामीण महिलाएं छोटे-छोटे बर्तन लेकर घरों से निकलती हैं और दूर जाकर गड्‌ढा खोदकर अपने और परिवार के लिए पानी का इंतजाम करती हैं। स्वच्छ पेयजल सुविधा करवाना हमारी प्राथमिकता है। मैंने पीएचई एसडीओ को निर्देशित किया है। वहां जाकर तत्काल व्यवस्था दुरुस्त करें। अधूरे पड़े नल जल योजना की भी जानकारी मांगी गई है।
निर्भय साहू, देवभोग एसडीएम

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