मीर के बयान से भाजपा की मुश्किलें बढ़ीं, मारे गए आतंकियों को बताया था शहीद

नई दिल्ली: सूबे की सरकार में भाजपा की गठबंधन सहयोगी पीडीपी के विधायक एजाज अहमद मीर के कश्मीरी आतंकियों के पक्ष में दिए गए बयान ने भाजपा की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालांकि यह कोई पहला अवसर नहीं है जबकि पीडीपी की ओर से इस तरह का विवादित बयान न आया हो।इससे पूर्व बीते साल जम्मू में जारी सत्र के दौरान स्वयं मुख्यमंत्री एवं पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने अनुच्छेद 35-ए व धारा 370 को हटाए जाने की कोशिशों की बाबत यह बयान दिया था कि जो भी इन धाराओं को कमजोर अथवा तोड़ने की कोशिश करेगा, वह देशद्रोही होगा।

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तब भी महूबबा मुफ्ती के उक्त बयान के बाद भाजपा पर सवाल खड़े हो गए थे। गौरतलब है कि दक्षिण कश्मीर के वाची से पीडीपी विधायक एजाज अहमद मीर के घर पर बीते साल 18 अक्टूबर को आतंकी हमला हुआ था। उस वक्त मीर घर पर नहीं थे लेकिन उनके परिजन इस हमले में बाल-बाल बचे थे। बीते साल ही राज्य सरकार में मंत्री नईम अख्तर, त्राल से विधायक मुश्ताक अहमद शाह, नूराबाद से पीडीपी विधायक अब्दुल मजीद पाडर सहित कई पीडीपी नेताओं पर हमले हुए।

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बीते साल ही जुलाई माह में पवित्र अमरनाथ यात्रा के यात्रियों बस पर भी आंतकी हमला हुआ था, जिसमें पीडीपी के एक विधायक का ड्राइवर तौसिफ अहमद वानी गिरफ्तार हुआ था। सूत्रों का कहना है कि पीडीपी के विधायक एजाज अहमद मीर का बयान पीडीपी की ही एक रणनीति का हिस्सा है। चूंकि दक्षिण कश्मीर में लंबे अरसे से पीडीपी का दबदबा रहा है। बताते चलें कि विधायक मीर ने जम्मू स्थित विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए यह पुरजोर कहा कि आंतकियों के मारे जाने पर जश्न मनाने की जरूरत नहीं है। चूंकि वह हमारे ही भाई हैं और शहीद हुए हैं।

मीर के इस बयान के बाद कांग्रेस के विधानसभा में नेता नवांग रिंगजिंग जोरा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से पूछा है कि वह यह बताएं कि आतंकबाद का मुकाबला करते अपनी जान दे रहे सुरक्षाकर्मियों को क्या कहेंगे। दरअसल पीडीपी विधायक एजाज अहमद मीर ने उक्त बयान देकर विपक्षी कांग्रेस को भाजपा व प्रधानमंत्री मोदी पर हमला करने का मौका दे दिया है।