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बीजेपी को फिर आई नेहरू की याद, अब लगाया ये नया इल्जाम

चुनावी मौसम में तो सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को खूब याद किया था. दोबारा मोदी सरकार बनने के बाद लगा कि देश पर आजतक आए हर संकट के लिए बीजेपी ने नेहरू को माफ कर दिया है. नेहरू को लेकर बीजेपी नेताओं की जुबान करीब 1 महीने से खामोश थी. लेकिन ये खामोशी अब टूट गई है. बीजेपी ने एक बार फिर नेहरू पर नए आरोप लगाए हैं.

23 जून, 1953 को संघ संस्थापक डॉ. श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी की रहस्‍यमय ढंग से मौत हुई थी. आज उनकी पुण्यतिथि है. संघ और बीजेपी से जुड़ा हर शख्स आज उनको श्रद्धांजलि दे रहा है. इसी दौरान भाजपा के कार्यकारी अध्‍यक्ष जेपी नड्डा ने प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू पर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मौत के मामले में जांच के आदेश नहीं देने का आरोप लगाया है.

नड्डा बोले कि जब पूरा देश डॉ. श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी की मौत की जांच की मांग कर रहा था तो पंडित नेहरू ने जांच का आदेश नहीं दिया. इतिहास इस बात का गवाह है. डॉ. मुखर्जी का बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाएगा, भाजपा इस कारण से प्रतिबद्ध है.

गौरतलब है कि मुखर्जी जम्मू कश्मीर को भारत का पूर्ण और अभिन्न अंग बनाना चाहते थे. आजादी के समय जम्मू कश्मीर का अलग झण्डा और अलग संविधान था. वहां का मुख्यमन्त्री (वजीरे-आजम) अर्थात् प्रधानमन्त्री कहलाता था. संसद में अपने भाषण में डॉ॰ मुखर्जी ने धारा-370 को समाप्त करने की भी जोरदार वकालत की.

अगस्त 1952 में जम्मू की विशाल रैली में उन्होंने अपना संकल्प व्यक्त किया था कि या तो मैं आपको भारतीय संविधान प्राप्त कराऊंगा या फिर इस उद्देश्य की पूर्ति के लिये अपना जीवन बलिदान कर दूंगा. उन्होंने नेहरू सरकार को चुनौती दी तथा अपने दृढ़ निश्चय पर अटल रहे. संकल्प को पूरा करने के लिये वे 1953 में बिना परमिट लिए जम्मू कश्मीर की यात्रा पर निकल पड़े. वहां पहुंचते ही उन्हें गिरफ्तार कर नजरबन्द कर लिया गया. 23 जून 1953 को रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गयी.

 

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