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योगी के कुंभ-आयोजन में गजब का भ्रष्टाचार, 17 विभाग खा गए 150 करोड़

दो महीने तक पूरी दुनिया के लिये आकर्षण का केंद्र बने प्रयागराज में आस्‍था के महापर्व कुंभ मेले को लेकर देश भर में उत्‍साह देखने को मिल रहा था। महापर्व कुंभ  देश भर से साधु संतों के अखाड़ों की पेशवाई रोजाना कुंभ में रौनक देखने को मिली। बताते चले कुंभ का आयोजन हर 12 साल पर किया जाता है। इस बार भी ार्मिक नगरी प्रयागराज में आयोजित किया गया वही व्‍यवस्‍था एकदम दुरुस्‍त रही | मगर अब एक खबर ने लोगो की नींद उड़ा दीे बताते चले दो महीने तक चला आस्‍था के महापर्व कुंभ समापन के बाद अब विवादों का दौर बढ़  रहा है|

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सरकारी विभागों में हुई बढ़ी धांधली

खबरों के मुताबिक कुछ दिन पहले कुंभ मेला में हुए विभिन्न निर्माण कार्यो को लेकर करोड़ो की धांधली पकड़ी गई तो अब उसी क्रम में ओवर बिलिंग का मामला सामने आया है। ये चिंता का विषय बनता जा रहा| बताते चले  निर्माण कार्यों में 150 करोड़ रुपये की भारी भरकम धनराशि को निगलने की तैयारी थी, लेकिन थर्ड पार्टी जांच में मामला पकड़ में आ गया है। मेला अधिकारी ने तत्काल प्रभाव से सभी बिलों के भुगतान पर रोक लगा दी है। साथ ही ओवर बिलिंग देने वाले विभागों से स्पष्टीकरण के लिऐ नोटिस जारी कर दिए है।

हैरानी की बात है कि यह कार्य किसी एक संस्था का नहीं बल्कि सरकारी डिपार्टमेंट के अलग-अलग 17 विभागों का है। ओवर बिलिंग का मामला सामने आते ही सभी विभागों के अफसरों में पैरो से नीचे से जमीन खिसक गयी । इस मामले में केंद्र सरकार तक का सीधा जुड़ाव होने के कारण अब जिम्मेदारी अधिकारियों पर गाज गिर सकती है। फिलहाल कुंभ लेखा टीम की रिपोर्ट में ओवर बिलिंग का सच सामने आने के बाद अब जांच का दायरा भी बढ़ेगा और अगर पूर्व में कुछ और मामले में भी हुये होंगे तो लेखा टीम उसकी भी जांच करेगी।

होगी जांच और कार्रवाई

इस मामले में कुंभ मेलाधिकारी विजय किरन आनंद ने बताया कि जिन विभागों से ओवर बिलिंग का मामला सामने आया है। उन्हें नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। ओवर बिलिंग का भुगतान नहीं किया जाएगा। आगे जांच के साथ कार्रवाई भी की जाएगी। फिहाल कुंभ के लिये मिले 2600 करोड़ रुपये के बजट में से ढाई सौ करोड़ रुपये बचा हुआ है। यह पैसा कई विभागों के काम नहीं कर पाने के कारण बचा है। अब इस धनराशि को शासन को लौटाया जाएगा। गौरतलब है कि इससे पहले पीडब्ल्यूडी की सड़क में भी त्रुटियां सामने आयी थी, जिसके बाद लगभग सौ करोड़ रुपये का भुगतान पहले से रुका हुआ है। वहीं, कुंभ कार्यों के भुगतान पर कार्यालय महालेखाकर भी नजर बनाये हुए हैं और सभी बड़े व एकमुश्त भुगतान की सूची तैयार की जा रही है।

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