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नीतीश के मंच पर खाली कुर्सी से शुरु हुई जो बात, वो बताती है कि होने वाला है ‘तलाक’ !

बिहार की राजधानी पटना में रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाकर ऐतिहासिक गांधी मैदान में पूरे हर्षोल्लास के साथ दशहरा का पर्व मनाया गया. हालांकि त्योहार के दिन भी बिहार की सत्ताधारी गठबंधन में मनमुटाव देखने को मिला. दरअसल, गांधी मैदान में आयोजित नितीश कुमार के रावण वध कार्यक्रम में भाजपा का कोई नेता मौजूद नहीं था. सबसे हैरत वाली बात तो यह थी कि मंच पर राज्य कांग्रेस अध्यक्ष मदन मोहन झा मौजूद थे. मंच पर बिहार कांग्रेस अध्यक्ष की मौजूदगी और भाजपा के नेता की अनुपस्थिति से अटकलें तेज हो गई हैं कि दोनों पार्टी में दरार पड़ चुकी है.

गौरतलब है कि कार्यक्रम में नितीश कुमार के बाद राज्य सरकार में हैसियत रखने वाले नेता सुशील मोदी की कुर्सी भी खाली थी. सबसे खास ये रहा कि मंच पर मुख्यमंत्री नितीश कुमार के बगल में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बैठे थे जबकि, सामान्‍यत: उनके बगल में उपमुख्‍मंत्री सुशील मोदी बैठते रहे हैं. पूरे कार्यक्रम के दौरान सभी की निगाहें मंच पर खाली सीटों पर रहीं. ऐसा माना जा रहा है कि खाली सीटों पर केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद, पाटलीपुत्र से सांसद राम कृपाल यादव और राज्य में मंत्री नंद किशोर यादव को बैठना था लेकिन सुशील मोदी के साथ ये नेता भी वहां अनुपस्थित रहे.

बिहार में सत्ताधारी गठबंधन NDA में बीते कई महीने से मनमुटाव चल रहा है. हाल ही में जेडीयू के मंत्री श्याम रजक ने जिस तरह से सुशील मोदी पर निशाना साधा था और पार्टी की तरफ से इस पर चुप्पी रही, ये बीजेपी नेताओं को नागवार गुजरा. वहीं, बाढ़ और जलभराव के मुद्दे पर भाजपा के नेताओं ने जिस तरह से सीएम नितीश कुमार पर निशाना साधा था उसे देखकर तो यही लगता है कि दोनों दलों में आंतरिक कलह एक बार फिर तेज हो गई है.

दरअसल, बिहार में जलभराव के मुद्दे पर दोनों दल आमने-सामने दिख रहे हैं. मुख्‍यमंत्री नितीश कुमार इसे प्राकृतिक आपदा बताते रहे हैं तो केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने इसके लिए सीधे तौर पर सीएम नीतीश को जिम्‍मेदार माना है. यहीं नहीं पूरे एनडीए की तरफ से जनता से माफी मांग उन्‍होंने जेडीयू की जिम्‍मेदारी भी तय करने की कोशिश की. वहीं नगर विकास मंत्री सुरेश शर्मा ने आरोप लगाया था कि अधिकारी उनकी बात ही नहीं सुनते थे. केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह राज्य में नितीश कुमार के खिलाफ खुलकर निशाना साध रहे हैं. उनके समर्थक भी उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की मांग कर चुके हैं. इस तरह से भाजपा बिहार के महत्वपूर्ण नेता बिग ब्रदर बनकर राजनीति करना चाहते हैं.

कुछ महीने पहले भी देखा गया कि भाजपा और जेडीयू में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. हर बार दोनों दलों के विचारों में टकराव देखने को मिला. उदाहरण के तौर पर तीन तलाक प्रकरण में जनता दल यूनाइटेड ने संसद में एनडीए सरकार के बिल का विरोध किया,  NRC, 35A और अनुच्छेद 370 के मुद्दे पर भाजपा को समर्थन नहीं देना भी दोनों दलों के बीच मनमुटाव का बड़ा कारण माना जा रहा है.

इससे पहले जेडीयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर भी पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के लिए काम कर रहे हैं. ज़ाहिर है वो बगैर नितीश कुमार के सहमति के ऐसा नहीं कर रहे होंगे. वहीं अभी कुछ दिन पहले बीजेपी के वरिष्ठ नेता और एमएलसी संजय पासवान ने कहा था कि हमने 15 वर्षों तक बिहार के मुख्यमंत्री के पद के साथ नितीश कुमार पर भरोसा किया, उन्हें भी हमें एक कार्यकाल के लिए मौका देना चाहिए.

ऐसे में भाजपा के महत्वपूर्ण नेता का खुले तौर पर फ्रंट फुट पर राजनीति करने की बात कहना और सीएम नीतीश के कार्यक्रम में भाजपा के एक भी नेता की मौजूदगी न होना व कांग्रेस नेता का मंच पर होना, इस बात की तरफ इशारा करता है कि आने वाले दिनों में भाजपा राज्य में अपने दम पर सरकार बनाएगी. अगर 2015 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के वोट शेयर को देखें तो साफ नजर आता है कि बिहार में भाजपा सरकार बना सकती है. वहीं राज्य में नितीश कुमार की स्थिति बेहद खराब लग रही है.

 

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