ख़बरदेश

बड़ी देर कर दी हुजूर आते-आते, शायद 125 बच्चों की मौत का ही था आपको इंतजार !

बिहार के मुजफ्फरपुर में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) यानी चमकी बुखार ने महामारी का रूप धारण कर लिया है. कई दिनों से मासूम बच्‍चों की मौत का सिलसिला जारी है. मरने वालों की संख्या बढ़कर 125 हो गई है, और अब जाकर सूबे के मुखिया को मुजफ्फरपुर जाने की फुर्सत मिली है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज मुजफ्फरपुर अस्पताल के दौरे पर हैं और वहां उनका स्वागत ‘सीएम वापस जाओ के’ नारों के साथ हुआ.

नीतीश से पब्लिक नाराज है, बेहद नाराज. और ये नाराजगी बिल्कुल जायज भी है. चमकी बुखार से अबतक 125 मासूम अपनी जान गवां बैठे हैं, वहीं 100 से ज्यादा बच्चे अभी इस बीमारी से जूझ रहें है.

इतनी बड़ी संख्या में मासूमों की मौत और बीमारी के महामारी का रुप लेने के बाद अब सीएम नीतीश कुमार इसका जायजा लेने के लिए आज मुजफ्फरपुर पहुंचे है. वो भी तब जबकि दिल्ली से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन तक मुजफ्फरपुर हो आए. लेकिन पटना में बैठे नीतीश को यहां आने के लिए आज के मुहूर्त का इंतजार करना पड़ा.

वैसे इससे पहले मुख्यमंत्री ने सोमवार को उच्चस्तरीय बैठक की,  जिसके बाद मुख्य सचिव दीपक कुमार ने बताया, सरकार ने फैसला किया है कि उनकी टीम हर उस घर में जाएगी जिस घर में इस बीमारी से बच्चों की मौत हुई है, टीम बीमारी के बैक ग्राउंड को जानने की कोशिश करेगी, क्योंकि सरकार अब तक यह पता नहीं कर पाई है कि आखिर इस बीमारी की वजह क्या है. कई विशेषज्ञ इसकी वजह लीची वायरस बता रहे हैं, लेकिन कई ऐसे पीड़ित भी हैं, जिन्होंने लीची नहीं खाई.

बैठक में फैसला किया गया कि चमकी से प्रभावित बच्चों को निशुल्क एंबुलेंस मुहैया कराई जाएगी और पूरे इलाज का खर्च सरकार उठाएगी. वहीं इस बीमारी से मरने वालों के परिजनों को 4 लाख रुपये मुआवजा दिया जाएगा. लेकिन इस मुआवजे से क्या होगा? सवाल का जवाब आप सब अच्छी तरह से जानते हैं.

Back to top button