डिनर डिप्लोमेसी : 2019 के फाइनल की टीम तैयार में सोनिया, 20 दलों के नेता हुए शामिल

डिनर डिप्लोमेसी मिशन 2019 ! सोनिया के घर 19 पार्टियों के नेताओं का जमघट

 भारतीय जनता पार्टी के विजय रथ को रोकने की तैयारी में सोनिया

अगले साल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों के मद्देनज़र देश में बदलते समीकरणों के बीच विपक्ष बीजेपी के खिलाफ एकजुट होने की कोशिश में जुटी है. इसी के तहत लोकसभा में विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस ने मंगलवार को ‘डिनर डिप्लोमेसी’ के तहत तमाम दलों के मुखियाओं को रात के खाने के लिए बुलाया . पूर्व कांग्रेस चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने 10 जनपथ स्थित अपने आवास पर इस डिनर पार्टी की मेजबानी की. 2004 के बाद सोनिया गांधी को एक बार फिर से नेतृत्व की बागडोर अपने हाथ में लेने की जरूरत है. उन्हें क्षेत्रीय पार्टियों के आगे खुद को लीडर के तौर पर पेश करना ही होगा. सोनिया अपने बेटे राहुल गांधी को भी विपक्ष के नेता के तौर पर आगे बढ़ा रही हैं. यह कांग्रेस के सम्मान और अस्मिता का सवाल है, जिसकी जिम्मेदारी एक बार फिर से सोनिया गांधी के कंधों पर है.

 

सोनिया गांधी की   डिनर पार्टी  में जिन 20 पार्टियों ने लिया हिस्सा

सोनिया गांधी के इस डिनर में जिन 20 पार्टियों ने हिस्सा लिया उनमें राम गोपाल यादव ( समाजवादी पार्टी), बदरुद्दीन अजमल ( एआईयूडीएफ), शरद पवार (एनसीपी), तेजस्वी यादव (आरजेडी), मीसा भारती (आरजेडी), उमर अब्दुल्ला (नेशनल कांफ्रेंस), हेमंत सोरेन (जेएमएम), अजीत सिंह (आरएलडी), डी राजा (सीपीआई), मोहम्मद सलीम (सीपीएम), कनिमोझी (द्रमुक), कुट्टी (मुस्लिम लीग), सतीश चंद्र मिश्रा (बीएसपी), केरल कांग्रेस, बाबू लाल मरांडी (जेवीएम), रामचंद्रन (आरएसपी), शरद यादव (भारतीय ट्राइबल पार्टी), सुदीप बंधोपाध्याय (टीएमसी), जीतन राम मांझी ( हिंदुस्तान अवाम मोर्चा ), डॉ. कुपेंद्र रेड्डी ( जेडी-एस ), सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मनमोहन सिंह, गुलाम नबी आजाद, मल्लिकार्जुन खड़गे, अहमद पटेल, एके एंटोनी, रणदीप सुरजेवाला ( कांग्रेस ) शामिल हैं.

एक तीर से दो निशाना
इस डिनर डिप्लोमेसी के जरिये सोनिया एक तीर से दो निशाना साधना चाहती हैं। पहला तो यह कि विपक्षी नेताओं को डिनर पर बुलाकर वह ये साबित करना चाहती हैं कि मोदी के विकल्प के तौर पर बनने वाले गठजोड़ का नेतृत्व कांग्रेस के पास ही होगा। दूसरा यह कि तीसरे मोर्चे की अगुवाई की कोशिश को तवज्जो नहीं देतीं। हालांकि कांग्रेस मानती है कि मोदी के खिलाफ सबको एकजुट होना ही पड़ेगा और ये पूरे विपक्ष की ज़िम्मेदारी है।
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ममता की अलग राह
तीसरे मोर्चे की वकालत कर ही ममता की बात कांग्रेस को रास नहीं आ रही है। ममता ने तीसरे मोर्चे के विकल्प तलाशने के लिए तेलंगाना के सीएम केसीआर को फोन किया था। टीडीपी और टीआरएस ने कांग्रेस की बैकडोर से की गई कोशिशों के बावजूद भोज में आने से फिलहाल इनकार कर दिया है।

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असदुद्दीन ओवैसी को नहीं बुलाने की वजह
2019 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस विपक्ष के सभी दलों को बीजेपी के खिलाफ एकजुट करने में जुट गई है। लेकिन इस कोशिश में एक बात खास यह रही कि मोदी पर लगातार शब्द बाण छोड़ने वाले ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद उल मुसलमीन (AIMIM) चीफ असदुद्दीन ओवैसी को नहीं बुलाया गया। सोनिया गांधी ने विपक्ष के सभी नेताओं को डिनर के लिए बुलाया लेकिन, ओवैसी को न्योता नहीं भेजा। कुछ दिन पहले ही तेलंगाना के मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव ने थर्ड फ्रंट बनाने का ऐलान किया था। इसके बाद असदुद्दीन ओवैसी ने केसीआर के थर्ड फ्रंट का स्वागत कर उसमें शामिल होने की इच्छा जाहिर की थी। यह साफ है कि ओवैसी कांग्रेस से दूरी बनाकर पार्टी का सियासी भविष्य देख रहे हैं। यूपीए सरकार में सहयोगी रहे असदुद्दीन ओवैसी 2014 में कांग्रेस का साथ छोड़ चुके हैं। कांग्रेस को लगता है कि ओवैसी कांग्रेस के वोट काटते हैं। इससे कहीं न कहीं बीजेपी को फायदा होता है। कांग्रेस ने ओवैसी पर बीजेपी के इशारों पर काम करने का भी कई बार इल्जाम लगाया है।
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टीआरएस को नहीं दिया न्योता

डिनर पार्टी के लिए तेलंगाना के मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव को भी कांग्रेस ने न्योता नहीं भेजा। टीआरएस नेताओं ने इस बात की पुष्टि की है कि कांग्रेस की तरफ से उन्हें न्योता नहीं मिला हैं। पार्टी का कहना है कि उन्हें सोनिया की डिनर पार्टी में शामिल होने के न्योते की उम्मीद भी नहीं थी। उनका कहना है कि अगर कांग्रेस टीआरएस को आमंत्रित करती, तभी भी डिनर पार्टी में शामिल होने का सवाल पैदा नहीं होता था। इसी तरह कांग्रेस ने आंध्र प्रदेश में टीडीपी को भी डिनर पार्टी के लिए आमंत्रित नहीं किया है। हालांकि, बीजेपी और टीडीपी की बीच बढ़ती दूरियों पर कांग्रेस टकटकी लगाए बैठी है। लेकिन, जब तक दोनों दलों के बीच औपचारिक तौर पर गठबंधन नहीं टूट जाता, तब तक सोनिया गांधी को डिनर पार्टी के लिए चंद्रबाबू नायडू को आमंत्रित करना शायद उचित नहीं लगा।
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ये नेता हुए शामिल

शरद यादव, बीएसपी के सतीश मिश्रा, आरएलडी के अजीत सिंह, टीएमसी के सुदीप बंदोपाध्याय, जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन, जेडीएस के उपेंद्र रेड्डी, केरल कांग्रेस के जोश के मनी, शरद पवार, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के जीतनराम मांझी, सपा के रामगोपाल यादव, डीएमके की तरफ से कनिमोई, वामपंथी दलों की ओर से मोहम्मद सलीम, डी राजा और जेवीएम के बाबूलाल मरांडी, मीसा भारती, तेजस्वी यादव, बदरुद्दीन अजमल, कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद।

इनको भेजा गया आमंत्रण

कांग्रेस, सपा, बीएसपी, टीएमसी, सीपीएम, सीपीआई, डीएमके, जेएमएम, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा, आरजेडी, जेडीएस, केरल काँग्रेस, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, आरएसपी, एनसीपी, नेशनल कांफ्रेंस, एआईयूडीएफ, आरएलडी को न्यौता भेजा गया।