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‘चाणक्य’-नीति: छोटा हो गया जम्मू-कश्मीर विधानसभा का कार्यकाल, बढ़ेंगी इतनी सीटें

दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के केंद्र सरकार के प्रस्ताव के लागू होने के बाद जम्मू कश्मीर विधानसभा में 7 सीटों का इजाफा होगा. विधानसभा सीटें 107 से बढ़कर 114 हो जाएगी. बता दें कि जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 के कई प्रावधानों को निष्प्रभावी घोषित किए जाने के साथ ही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने संबंधी विधेयक को राज्यसभा में मंजूरी मिल गई है.

जम्मू और कश्मीर विधानसभा की वर्तमान प्रभावी ताकत 87 है. इनमें कश्मीर में 46, जम्मू में 37 और लद्दाख में 4 सीटें हैं. विधानसभा की 24 सीटें खाली रह गई हैं क्योंकि वे पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के अंतर्गत आती हैं. इन सभी सीटों को जोड़ा जाए तो विधानसभा की कुल सीटें 107 होती है. केंद्र सरकार के प्रस्ताव के बाद लद्दाख अब विधानसभा के बिना एक अलग केंद्र शासित प्रदेश बन जाएगा. एसे में लद्दाख की 4 सीटों को हटाने और परिसीमन के बाद विधानसभा की सीटें बढ़कर 114 हो जाएगी.

विधेयक के अनुसार विधानसभआ में मंत्रिमंडल की संख्या विधानसभा सदस्यों के 10% से ज्यादा नहीं होगी. इसका नेतृत्व मुख्यमंत्री करेंगे जो कि उप-राज्यपाल को सलाह में मदद करेंगे. विधानसभा में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों की संख्या संविधान के मौजूदा प्रावधानों के तहत होगी. विधेयक में कहा गया है कि अगर जम्मू-कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर को लगता है कि महिलाओं को “पर्याप्त रूप से” विधानसभा में प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है तो वो दो सदस्यों को नामित कर सकते हैं. लोकसभा में जम्मू-कश्मीर की पांच सीटें होंगी, जबकि लद्दाख में एक सीट होगी.

बता दें कि केंद्र शासित प्रदेशों की फेहरिस्त में दो नए राज्य जुड़ने का मार्ग प्रशस्त होने के बाद अब केंद्र शासित प्रदेशों की संख्या 9 हो जाएगी. मौजूदा समय में सिर्फ दिल्ली और पुदुचेरी में विधानसभा हैं, लेकिन अब जम्मू-कश्मीर भी विधानसभा वाला तीसरा केंद्र शासित प्रदेश हो जाएगा. सांसदों की संख्या के लिहाज से दिल्ली नबंर एक पर है. संसद में दिल्ली का प्रतिनिधित्व 7 लोकसभा और 3 राज्यसभा सदस्य करते हैं.

गौरतलब है कि सोमवार को ऐतिहासिक फैसले लेते हुए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर को स्पेशल स्टेटस देने वाले आर्टिकल 370 को खत्म कर दिया. गृहमंत्री अमित शाह ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मंजूरी के बाद संसद में यह प्रस्ताव रखा. अब राष्ट्रपति ही आर्टिकल 370 को आर्टिकल 379(3) के तहत खत्म कर सकते हैं. इसके लिए जम्मू-कश्मीर संविधान की अनुशंसा की जरूरत है.

 

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