खतरे में राजधानी,’फॉग होल’ से दिल्ली में बीमार पड़ रहे लोग

मौसम पर प्रदूषण का असर ऐसा गहरा है कि दिसंबर-जनवरी में का कोहरा भी जल्दी छंट जा रहा है. शहरी क्षेत्रों में ऐसा अधिक हो रहा है. कोहरे की सघनता में विश्व स्तर पर भी कमी आई है.पिछले कुछ सालों से घना और प्रदूषित कोहरा इंडो-गंगेटिक प्लेन जैसे उत्तर भारत, पाकिस्तान, नेपाल और बंग्लादेश के लिए समस्या बन गया है. इसका असर हवाई, रेल और सड़क मार्ग पर काफी अधिक पड़ रहा है. एशिया, यूरोप और यूएस के घनी आबादी वाले क्षेत्रों में कोहरा बहुत देर तक नहीं रहता. इस तरह की सबसे अधिक स्थिति दिल्ली में देखी गई है. शोध में कहा गया है कि प्रदूषण की वजह से कोहरा बनने की प्रक्रिया धीमी हो रही है. माना जा रहा है कि दिल्ली में आबादी और प्रदूषण वाले क्षेत्रों में कोहरा तेजी से खत्म हो रहा है.

सबसे ज्यादा फॉग होल दिल्ली में


रिपोर्ट के अनुसार बताया गया है कि पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा फॉग होल भारत की राजधानी दिल्ली में पाए गए, प्रदूषण और फॉग होल की वजह लोग भारी मात्रा में बीमार हो रहे है. फॉग होल के कारण सिर्फ इंसान ही नहीं बल्कि पक्षियों और जानवरों की सेहत पर भी बुरा असर पड़ रहा है, जिसके उस जगह के पक्षी वहां से पलायन कर रहे हैं. डॉक्टरों के अनुसार इस समस्या का निराकरण नहीं किया गया तो ये कई बीमारियों के रूप में हमें नुकसान पहुंचा सकती है.

क्या है फॉग होल

आपको बता दें की फॉग होल कोहरे के बीच में एक खाली जगह होती है, जिससे आसमान साफ दिखाई देता है. जमीन के उस हिस्से में तापमान बाकि जगहों की तुलना में बढ़ जाता है, जो सीधे तौर पर हमारे लिए हानिकारक होता है. सर्दी के दिनों में वातावरण की नज़र से देखा जाएँ तो कोहरा महत्वपूर्ण होता है. जिस गति से ये होल बढ़ रहे है उस हिसाब से ये और चिंता का विषय हो जाता है. फोग होल में न्यूतम और अधिकतम तापमान में बहुत अंतर होता है.

इसी विषय पर शोध कर रहे प्रोफेसर रितेश और मनोज सिंह बताते है की दिल्ली में प्रदूषण की मात्रा बढ़ने के कारण कोहरे के बनने की प्रकिया काफी धीमी हो गई है. फॉग होल उन्ही जगह पर अधिक होता है जो जगह प्रदूषित या भारी ट्रैफिक वाले होती है. प्राप्त जानकारी के अनुसार दिसंबर और जनवरी महीने में दिल्ली में करीब 90 फॉग होल हो गए हैं. पिछले 8 सालों में दिल्ली में फॉग होल तेजी से बन रहे हैं.