मासूम को क़ुदरत ने कर दिया मजबूर, उम्मीद है कि आप मदद करेंगे ज़रूर

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राजधानी के चांदबड़ निवासी ओम कुशवाह (5 वर्ष) की दोनों आंख बाहर निकल आईं हैं। परिजन ने राजधानी से लेकर दिल्ली एम्स तक के डॉक्टरों को दिखाया। डॉक्टरों ने ओम को वेस्कुलर ट्यूमर होना बताया। साथ ही तत्काल सर्जरी कराने की जरूरत बताई है। इस पर 25 लाख रुपए का खर्च आएगा।

मंडीदीप की फैक्ट्री में 6 हजार रुपए की नौकरी करने वाले ओम के पिता मुकेश कुशवाह के पास इतना पैसा नहीं है। हालांकि, स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट ने मीडिया से बातचीत में बच्चे ओम के इलाज के खर्च की जिम्मेदारी उठाने का आश्वासन दिया है।

ओम की मां सुनीता कुशवाह ने बताया कि दिल्ली एम्स से लौटने के बाद वे मुख्यमंत्री निवासी समेत प्रमुख सचिव स्वास्थ्य के कार्यालय गई थीं। यहां स्टाफ ने आवेदन ले लिया है और अस्पताल की तरफ से मिले एस्टीमेट के कागजात लगाने को कहा है। सुनीता की मुसीबत यह है कि उनके पास इतने पैसे नहीं हैं कि वे ऑपरेशन का एस्टीमेट बनवाने दिल्ली एम्स या हैदराबाद जा पाएं। ऐसे में सुनीता ने बाल कल्याण समिति में गुहार लगाई है।

सेरेब्रल पाल्सी रोग भी

ओम सेरेब्रल पाल्सी से ग्रसित होने के कारण चलने-फिरने में असमर्थ है। ओम के सेरेब्रल पाल्सी से ग्रसित होने से कोई परेशानी नहीं थी। लेकिन आंख में संक्रमण के कारण उसकी हालत बिगड़ती जा रही है। सुनीता ने बताया कि 21 दिसंबर की रात 10 बजे ओम घर में खेल रहा था। अचानक उसकी बाईं आंख बाहर निकल आई। परिजन उसे डॉक्टर के पास लेकर पहुंचे तो उन्होंने ड्रॉप और कुछ दवाएं दे दीं। फायदा नहीं हुआ तो परिजनों ने उसे प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया। यहां हालत में सुधार नहीं हुआ तो परिजन हमीदिया अस्पताल पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने जांच की तो पता चला कि ओम को वेस्कुलर ट्यूमर है, जो एडवांस स्टेज पर है।

आयुष्मान योजना भी नाकाफी
ओम का परिवार आयुष्मान भारत योजना का हितग्राही है। इस योजना में पांच लाख तक का इलाज दिया जाता है। ऐसे में योजना का लाभ मिलने के बाद अतिरिक्त 20 लाख रुपए की जरूरत होगी।

एम्स दिल्ली रेफर किया 
हमीदिया अस्पताल के नेत्र रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ. कविता कुमार ने बताया कि ओम के परिजन उन्हें हमीदिया लेकर आए थे। बच्चे को वेस्कुलर ट्यूमर है, जो एडवांस स्टेज में पहुंच चुका है। शुरुआती दिनों में हम इलाज कर सकते थे, लेकिन अब भोपाल में इलाज संभव नहीं है। हमने उसे एम्स दिल्ली के लिए रेफर किया था।
मप्र सरकार उठाएगी खर्च 

 

देश के अच्छे से अच्छे अस्पताल में और बेहतर से बेहतर नेत्र रोग विशेषज्ञ से उपचार कराया जाएगा। इस पर जितना भी खर्च आएगा, उसे मध्य प्रदेश सरकार वहन करेगी।

तुलसी सिलावट, स्वास्थ्य मंत्री, मध्य प्रदेश