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आपातकाल : 3 साल तक जिस कोठरी में छिपकर रहे मोदी, आज वहां है ये मंदिर

25 जून, 1975 की रात. तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के सामने एक लिखित प्रस्ताव पेश किया जाता है. वे तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के चार लाइन के इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करते हैं और अगले दिन से ही देशवासियों के सारे नागरिक अधिकार समाप्त हो जाते हैं. हजारों लोगों की गिरफ्तारियां होती हैं और यातनाओं का दौर शुरू हो जाता है. आज 44 साल बाद देश इसे ‘आपातकाल’ के भयानक दौर के रूप में याद करता है. वह दौर ऐसा था जब गिरफ्तारी से बचने के लिए आज के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिख वेश धारण कर लिया था. वे वेश बदल-बदलकर संघ का प्रचार किया करते थे.

दरअसल मोदी आपातकाल से ही गुजरात की राजनीति में सक्रिय हो चुके थे. सन् 1975 से 77 तक वे भूमिगत रहे थे. इस दौरान भी मोदी आरएसएस के कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय रहे और भेष बदल-बदलकर संघ का प्रचार करते थे. मोदी ने तीन साल का समय एक छोटे से कमरे में ढेरों मुश्किलों के साथ गुजारा था. आपातकाल के दौरान मोदी धोलका गांव के एक छोटे-से कमरे में रहे. आज इस कमरे ने शिव मंदिर की जगह ले ली है.

धोलका गांव में स्थित इस इस छोटी-सी कोठरी में मोदी ने लगभग तीन साल का समय गुजारा. यह कमरा 6 बाय 11 फुट का है. सीधे शब्दों में कहें तो इतना छोटा कि दो व्यक्ति पैर फैलाकर ठीक से सो भी न सकें. इसके अलावा छत भी कच्ची थी. भीषण गर्मी में छत तपती थी तो बारिश में कमरे में पानी भर जाया करता था. मोदी अपने लिए खाना भी यहीं पकाया करते थे. मोदी ने काफी मुश्किलें झेलते हुए यहां तीन साल का समय गुजारा. आपातकाल खत्म होते ही वे अहमदाबाद चले गए थे.

मोदी के यहां से जाते ही ग्रामीणों ने यहां शिव मूर्ति की स्थापना कर दी थी. आज यह कमरा महोदव मंदिर के नाम से पहचाना जाता है. 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान ग्रामीणों ने इसी मंदिर में मोदी की जीत के लिए एक महायज्ञ भी किया था. महायज्ञ में भाग लेने के लिए धोलका के आसपास के गांवों से हजारों की संख्या में लोग यहां पहुंचे थे.

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