धर्म

आखिर मिल गया नरक का दरवाजा, वीडियो देख कर जानिए ये है कहां ?

इस बात से सभी भलीभांति परिचीत है कि भगवान ने एक-एक चीज़ का निर्धारित किया है. जैसे ही इन चीजों का समय पूरा हो जाता है उनको भगवान अपने पास बुला लेते है. यह बात गीता में भी लिखी गई है कि जिसने भी इस धरती पर जन्म लिया है उसकी मृत्यु अवश्य ही होगी है.कोई भी इस दुनिया में अमर नही रह सकता सबकी कभी ना कभी मौत होगी ही होगी.

मौत एक ऐसा सच है जिसको कोई भी झूठा साबित नहीं कर सकता है.हिंदू धर्म में कहा जाता है कि जो लोग अच्छे कर्म करते है मरने के बाद उन्हें स्वर्ग में जगह मिलती है इसके उल्टे जो लोग बुरे कर्म करते है उन्हें मरने के बाद नरक में स्थान मिलता है.

शास्त्रों में कहा जाता है कि जो लोग अच्छे कर्म करते है उन्हें मरने के बाद लेने खुद देवी-देवता आते है और जो लोग बुरे काम करते है उन्हें लेने खुद यमदूत आते हैं और उन्हें उनके द्वारा किये गए बुरे कामों की सजा देते है.आज तक किसी को भी नही पता की आखिर नरक है कहा.इस सवाल का जवाब आज तक कोई नहीं ढूंढ पाया है ना किसी ने ढूंढने की कोशिश की है.

जीवन और मौत को लेकर लोग हमेशा चिंतित रहते हैं. भले ही विज्ञान ने आज के समय में जितनी भी सफ़लता हासिल कर ली हो. लेकिन मौत को वश में कर पाना उसके लिए भी मुमकिन नहीं है. लेकिन भगवान शंकर से संबंधित शिवपुराण में ऐसी कई बातें बताई गई हैं जो मौत के आने के संकेतों की ओर इशारा करती हैं.

आपने धरती के उस चित्र को तो जरुर देखा होगा जिसमें आपको धरती की अलग-अलग परत देखने को मिलती है पर आपको यह जानकार हैरानी होगी की वैज्ञानिक आज तक ये जान ही नहीं पाए की असल में अर्थ के इन हिस्सों के नीचे है क्या?

जी हाँ आपने बिलकुल सही सुना आपके मन में शायद यह सवाल जरुर उठता होगा की यहां पर हम धरती के नीचे के हिस्से की बात क्यों कर रहे रहे है.हमे स्कूल और कॉलेज में यह सब क्यों पढ़ाया जाता है कि मरने के बाद इंसान या तो नरक में जाता है या स्वर्ग में.पर नरक और स्वर्ग है कहा इसका जवाब आज तक वैज्ञानिकों को भी नहीं मिल पाया है.

आजतक के सबसे गहरे गड्ढे की बात करे तो इसकी गहराई 12 किलोमीटर तक है और यह धरती का सबसे गहरा हिस्सा है. ये एक ऐसा गड्ढा जिसको आज तक इंसान ने देखा है और ये समुन्द्र के सबसे गहरे पॉइंट से भी गहरा है और ये गहरे पोजीशन की रेस में सबसे आगे है.

वीडियो में देखिये तो ये है नरक तक जाने का दरवाजा 

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