भगवान शिव और कृष्ण की कहानी से जुड़ा है लोहड़ी का त्योहार,जानिए कैसे

लोहड़ी उत्तर भारत का एक प्रसिद्ध पर्व है. यह मकर संक्रांति के एक दिन पहले मनाया जाता है. मकर संक्रांति की पूर्वसंध्या पर इस त्योहार का उल्लास रहता है. रात्रि में खुले स्थान पर परिवार और पड़ोसी लोगों के साथ मिलकर आग के किनारे घेरा बनाकर बैठते हैं. इस समय रेवड़ी, मूंगफली, लावा आदि का भोग लागते हैं.

यूं तो लोहड़ी सर्दी के मौसम के जाने और फसलों से जुड़ा पर्व है लेकिन भगवान श्री कृष्ण और श‍िव जी से भी इस त्‍योहार को मनाने की कथाएं जुड़ी हैं.

कृष्ण ने क‍िया था लोहिता का वध

Advertisement

एक प्रचालित लोक कथा के अनुसार मकर संक्रान्ति के दिन कंस ने श्री कृष्ण को मारने के लिए लोहिता नाम की राक्षसी को गोकुल भेजा था. जिसे श्री कृष्ण ने खेल-खेल में ही मार डाला था. उसी घटना के फलस्वरूप लोहड़ी पर्व मनाया जाता है. सिंधी समाज भी मकर संक्रांन्ति के एक दिन पूर्व इसे ‘लाल लोही’ के रूप में मनाता है.

advt

 

भगवान श‍िव और सती से जुड़ी कथा

लोहड़ी मनाने और इस दौरान आग जलाने की परंपरा की एक पौराण‍िक कथा भगवान श‍िव और सती से भी जुड़ी है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, लोहड़ी के दिन आग जलाने को लेकर माना जाता है कि यह आग्नि राजा दक्ष की पुत्री सती की याद में जलाई जाती है. एक बार राजा दक्ष ने यज्ञ करवाया और इसमें अपने दामाद शिव और पुत्री सती को आमंत्रित नहीं किया. इस बात से निराश होकर सती अपने पिता के पास और पूछा कि उन्हें और उनके पति को इस यज्ञ में निमंत्रण क्यों नहीं दिया गया. इस बात पर अहंकारी राजा दक्ष ने सती और भगवान शिव की बहुत निंदा की. इससे सती बहुत आहत हुईं और क्रोधित होकर खूब रोईं. उनसे अपने पति का अपमान नहीं देखा गया और उन्होंने उसी यज्ञ में खुद को भस्म कर लिया. सती के मृत्यु का समाचार सुन खुद भगवान शिव ने वीरभद्र को उत्पन्न कर उसके द्वारा यज्ञ का विध्वंस करा दिया. तब से माता सती की याद लोहड़ी को आग जलाने की परंपरा है.

दुल्‍ला भट्टी को भी करते हैं याद

लोहड़ी को दुल्ला भट्टी की एक कहानी से भी जोड़ा जाता है. मुगल काल में अकबर के दौरान दुल्ला भट्टी पंजाब में रहा करता था. कहा जाता है कि दुल्ला भट्टी ने पंजाब की लड़कियों की रक्षा की थी. क्योंकि उस समय अमीर सौदागरों को सदंल बार की जगह लड़कियों को बेचा जा रहा था. एक दिन दुल्ला भट्टी ने इन्हीं सौदागरों से लड़कियों को छुड़वा कर उनकी शादी हिन्दू लड़कों से करवाई. इसी तरह दुल्ला भट्टी को  नायक की उपाधि से सम्मानित किया गया और हर लोहड़ी को उसी की ये कहानी सुनाई जाती है.

सुंदर मुंदरिये ! ………………हो तेरा कौन बेचारा, ……………..हो दुल्ला भट्टी वाला, ……………हो दुल्ले घी व्याही, ………………हो सेर शक्कर आई, ……………..हो कुड़ी दे बाझे पाई, ……………..हो कुड़ी दा लाल पटारा, ……………हो

ये है लोहड़ी का महत्व

पंजाब का यह पारंपरिक त्यौहार लोहड़ी फसल की बुआई और कटाई से जुड़ा एक विशेष त्योहार है. पंजाब में यह त्योहार नए साल की शुरुआत में फसलों की कटाई के उपलक्ष्य के तौर पर मनाई जाती है. लोहड़ी के त्योहार के अवसर पर जगह-जगह अलाव जलाकर उसके आसपास भांगड़ा-गिद्धा क‍िया जाता है.