देश

मुजफ्फरपुर में बच्चों का मरना एक रस्म हो गया है… अगले साल फिर मातम मनाएंगे

बिहार में चमकी बुखार के चलते बच्चों के मरने का सिलसिला रुक नहीं रहा. यह मेडिकल कॉलेज के अस्पताल का हाल है. अगर हेल्थ सेंटर की असली तस्वीर और लोगों की तकलीफ दिखा-सुना दें तो डर ना पैदा हो जाए तो कहिएगा.

सैकड़ों बच्चे सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती हैं. अस्पताल के हर कोने से रोने की आवाजें 24 घंटे आती हैं. आईसीयू से कोई शव बाहर निकलता है तो कोहराम मच जाता है. यहां सिर्फ और सिर्फ सफेद कपड़े में लिपटे मासूमों के शव, उन्हें सीने से चिपकाए रोती-बिलखती मांएं और दूर कहीं सिसकते पिता की तस्वीरें दिखती हैं.

एक मां अपनी सास को पकड़कर रो रही थी. उसके पति उसे पहले ही छोड़कर जा चुके थे. 10 साल का बेटा ही सब कुछ था, लेकिन अफसोस वो चमकी का शिकार हो गया. यह मंजर मेरे लिए सबसे दुखदायी था. वार्ड में जैसे ही डॉक्टर आते हैं, उम्मीदों भरी निगाहें उन्हें घेर लेती हैं. हर जुबान से बस यही आवाज आती है, डॉक्टर साहब, मेरे बच्चे को बचा लीजिए, क्या मेरा बच्चा बच जायेगा?

आपने उस शख्स का शायद वीडियो देखा होगा जो केंद्रीय मंत्रियों से अपना दुखडा न सुना पाने पर कहता है “मेरे बच्चे मर रहे हैं मुझे भी मार दो.” जब ये हंगामा हो रहा था उसी वक्त अस्पताल के दूसरे कोने में लकड़ी के बेंच पर लेटी एक मां रो रही है. कुछ समय पहले ही उसकी बच्ची की मौत हुई थी.

बिहार में और खासकर मुजफ्फरपुर के इलाके में मरना एक रस्म हो गया है. हर साल सैक़ड़ों की तादाद में बच्चे मरेंगे. मीडिया वाले लचर व्यवस्था, बदहाली, बेबसी की दर्दनाक कहानियां दिखाएंगे, नेता लोग आंएंगे जाएंगे, मंत्रियों के एलानिया बयान सुनाए जाएंगे, धीरे धीरे मरना कम हो जाएगा, माीडिया के डेरे डंडे उठ जाएंगे, नेता जी- मंत्री जी अपनी धुन में मगन हो जाएंगे, बदहाली-बदइंतजामी के हालात वहीं और वैसे ही पड़े रह जाएंगे, अगले साल फिर मातम मनाएंगे…..

Back to top button