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बेबस बाप का दर्द: “साहब, बड़ी दुआओं के बाद पैदा हुआ था हमरा बच्चा, ठीक हो जाएगा न ?” 

बिहार के मुजफ्फरपुर और आसपास के जिलों में संदिग्ध बुखार से अब तक 84 बच्चों की मौत हो चुकी है और अभी 100 से ज्यादा बच्‍चों का इलाज चल रहा है. रोज होती मौतों को देखकर बीमार बच्चों के परिजनों की सांसें अटकी हुई हैं. कोई भगवान के सामने हाथ जोड़ रहा है तो कोई बीमार कलेजे के टुकड़े को एकटक निहार (देखना) रहा है. लोग इसे चमकी बुखार (दिमागी बुखार) बता रहे हैं.

मुजफ्फरपुर के मेडिकल कॉलेज में जिस वार्ड में बच्चे एडमिट हैं वहां कोई एक दूसरे से बात नहीं कर रहा है. यहां मौजूद हर शख्‍स को किसी अनहोनी का डरा लगा हुआ है. सभी उम्मीद भरी नजरों से अपने जिगर के टुकड़ों को देख रहे हैं कि वह जल्दी ठीक हो जाएंगे.

यहीं एक बेबस बाप अशोक कुमार का नौ माह का बेटा वीर कुमार भर्ती है. उसे चमकी बुखार हो गया है. दो दिन से उसने अंख नहीं खोली है. अशोक दिन भर इस उम्मीद में बेटे को एकटक देखते रहते हैं कि शायद उसके कलेजे जा टुकड़ा आंख खोल दे. बीमार बेटे को देखते देखते अशोक की आंखें पथरा गई हैं.

” बड़ी दुआओं और मिन्नतों के बाद मेरा बेटा पैदा हुआ था. लड़का था इसलिए इसका नाम वीर रख दिया. इकलौता बेटा है इसलिए खूब प्यार करता हूं. घर के सभी इसे बहुत चाहते हैं, लेकिन 14 जून को दोपहर में अचानक से तेज बुखार आ गया, जोर-जोर से रोने लगा. सबकी सांसें अटक गई, कहीं चमकी तो नहीं न हो गया. आनन-फानन में अस्पताल लेकर पहुंचे. डॉक्टर ने कहा चमकी है. दो दिन हो गया हमरा बच्चा आंख नहीं खोल रहा है.” इतना कहते कहते अशोक फफक पड़े.

इसी तरह से पास के बेड पर लेटे बीमार दिलकश (10 माह) के पिता उमेश (24 वर्ष) का भी हाल कुछ ऐसा ही है. जब जब डॉक्टर उसके बेटे को देखने आते हैं तो उमेश का सिर्फ एक सवाल होता है,” साहब हमरा बच्चा ठीक हो जाएगा न”

कहते हैं कि पिता भी अपने बेटे को उतना ही प्यार करता है जितना कि माँ. बेटे को चोट लगने पर उसे उतना ही दर्द होता है, जितना कि एक माँ को. यह बात अलग है कि पिता को कठोर समझा जाता है. मुजफ्फरपुर के मेडिकल कॉलेज में हर मौत के बाद माँ की चीख के साथ-साथ लाचार बाप की सिसकियां भी सुनी जा सकती हैं. हर मौत मां के साथ-साथ एक पिता के धैर्य की परीक्षा ले रही है.

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