फांसी देने वाले जल्लादों को मिलती है इतनी सैलरी, जानकर बुझ जाएगी दिमाग की बत्ती

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मौत एक ऐसी सजा है जो व्यक्ति का जीवन हमेशा के लिए खत्म कर देती है. जी हां जिस व्यक्ति को उसके अपराध के लिए मौत की सजा सुनाई जाती है, उस व्यक्ति का जीवन वही खत्म हो जाता है. वैसे भी अपराधियों को उनके अपराध के लिए कड़ी से कड़ी सजा मिलनी ही चाहिए. अब यूँ तो अपराधियों को मौत की सजा सुनाने का काम अदालत ही करती है, लेकिन उन्हें फांसी पर लटकाने का काम तो जल्लाद ही करते है. जी हां इन जल्लादो को इसके लिए अच्छी खासी कीमत यानि सैलरी भी दी जाती है.

हालांकि जल्लादो के लिए भी यह काम करना आसान नहीं होता. अब ये तो सब को मालूम है कि किसी भी देश की व्यवस्था को सही ढंग से चलाने के लिए ही कुछ क़ानूनी नियम बनाएं जाते है, ताकि लोगो के मन में कानून और अपराध के प्रति डर बना रहे और वह कोई गलत काम न करे. हालांकि इसके बावजूद भी बहुत से लोग ऐसे है जो गलत काम करने से पीछे नहीं हटते. गौरतलब है कि जो व्यक्ति जिस तरह का जुर्म करता है, उसे उसी तरह की सजा कानून द्वारा दी जाती है. मगर जब कोई व्यक्ति बहुत ही बड़ा अपराध करता है और वह अपराध माफ़ करने के लायक नहीं होता, तब उसे फांसी की यानि मौत की सजा सुनाई जाती है.

वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दे कि हर देश की कानून प्रणाली अलग होती है. ऐसे में हर देश में अपराधियों को मौत की सजा भी अलग अलग तरीको से दी जाती है. जी हां किसी देश में अपराधी को गोली मार उसकी हत्या की जाती है तो कही अपराधी को पत्थर मार मार कर मौत की सजा दी जाती है. वही हमारे भारत देश में अपराधी को फांसी पर लटका कर मौत की सजा दी जाती है. गौरतलब है कि हमारे भारत देश में फांसी की सजा का चलन ब्रिटिश काल से पहले से चला आ रहा है. हालांकि भारत में बहुत ही मुश्किल से किसी अपराधी को मौत की सजा सुनाई जाती है और वो भी तब जब कानून के पास दूसरा कोई रास्ता नहीं होता.

शायद इसलिए कानून प्रणाली में इसे सबसे बड़ी सजा कहा जाता है. बरहलाल इस सजा को अंजाम तक पहुँचाने का काम तो जल्लाद ही करते है. बता दे कि जल्लाद को यह काम करने के लिए कानून द्वारा ही नियुक्त किया जाता है. बता दे कि यह एक ऐसा काम है जिसके लिए उन्हें पैसे भी मिलते है. वैसे आपको जान कर हैरानी होगी कि वर्तमान समय में पूरे भारत में केवल दो ही परिवार है.

इसके इलावा आपको बता दे कि भारत में जल्लाद की सैलरी कुछ खास नहीं होती. हालांकि पारिवारिक भत्ते के रूप में इन्हे कुछ पैसे जरूर दिए जाते है. बता दे कि पहले जल्लादो को केवल दो सौ रूपये दिए जाते थे. मगर अब इस राशि को बढ़ा कर तीन हजार से पांच हजार तक कर दिया गया है. अब यूँ तो भारत में जल्लादो की संख्या काफी कम हो गई है, लेकिन फिर भी अपराधियों को फांसी की सजा तो सुनाई ही जाती है.

ऐसे में अब न्याय प्रणाली ही अपराधियों को सजा देने का कोई नया तरीका ढूंढ सकती है.