धर्म

अमरनाथ यात्रा से मुस्लिमों का है ये खास कनेक्शन, जानकर आप रह जाएंगे दंग

अमरनाथ गुफा हिंदुओं की आस्था का बहुत बड़ा केंद्र हैं. मान्यता के मुताबिक भगवान शिव ने यहीं पर पार्वती को अमर होने का रहस्य बताया. लेकिन इस पौराणिक मान्यता से ज्यादा बड़ी बात ये है कि इस गुफा को पहली बार एक मुस्लिम ने ढूंढने का दावा किया. यही वजह है कि कश्मीर के सभी राजनीतिक दलों ने इस आतंकी हमले को हिंदू मुस्लिम एकता तोड़ने की नापाक कोशिश बताई है.

 

हर व्यक्ति अपने जीवन में कम से कम एक बार अमरनाथ यात्रा कर बाबा बर्फानी के दर्शन अवश्य करना चाहता हैं. इस अमरनाथ यात्रा में कई कठिनाइयाँ आती हैं, जान का जोखिम भी होता हैं लेकिन फिर भी लोग भगवान का नाम लेकर आगे बढ़ निकलते हैं. कल यानी 27 जून को अमरनाथ यात्रा शुरू हो चुकी हैं. अब तक इस यात्रा के लिए मुसाफिरों के दो जत्थे रवाना हो चुके हैं. अभी तक इस यात्रा के लिए 1.96 लाख तीर्थयात्री रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं. ऐसे में यात्रियों की कड़ी सुरक्षा का भी ध्यान रखा गया हैं. जानकारी के मुताबिक 60 दिनों तक चलने वाली इस अमरनाथ यात्रा के दौरान करीब 40 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात रहेंगे. हर साल की तरह इस साल भी ये यात्रा श्रावन पूर्णिमा (26 अगस्त, रक्षा बंधन) के दिन समाप्त होगी

 

आज की तारीख में भले ही किसी विशेष समुदाय के लोगो को आतंकी हमलों और हिन्दू धर्म को नुकसान पहुँचाने के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता हो लेकिन आपको जान हैरानी होगी कि इस अमरनाथ यात्रा से सिर्फ हिन्दुओं का ही नहीं बल्कि मुस्लिमों का भी एक गहरा नाता हैं. आज इसी बात से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी आपको बताने जा रहे हैं.

आप में से कईयों को ये बात जान हैरानी होगी कि अमरनाथ गुफा को खोजने का श्रेय एक मुस्लिम व्यक्ति को जाता हैं. हुआ दरअसल ये कि बूटा मलिक नाम का एक मुस्लिम गडरिया एक दिन अपनी भेड़ों को चरा रहा था. ऐसे में वो अपनों भेड़ों को चराते चराते बहुत दूर जा निकला. यहाँ पहाड़ों के बीच उसकी मुलाकात एक साधू से हुई. चुकी बूटा व्यवहार में काफी विनम्र और दयालु था इसलिए ये साधू उससे प्रसन्न हुआ और उसने ठण्ड से बचने के लिए बूटा को कोयले से भरी कांगड़ी ( हाथ सेकने वाला पात्र ) दिया. बूटा इस कांगड़ी को लेकर घर आ गया. जब उसने घर पर इसे खोला तो इसमें कोयले की बजाए सोना भरा हुआ था. बूटा की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा. वो साधू का शुक्रियां अदा करने दुआर उसी पहाड़ी पर गया.

 

लेकिन दिलचस्प बात ये रही कि इस पहाड़ी पर उसे साधू की बजाए एक गुफा मिली. जब बूटा इस गुफा के अन्दर घुसा तो उसने देखा कि यहाँ बर्फ से बनी एक सफ़ेद शिवलिंग चमचमा रही थी. बूटा ने ये बात अपने गांववालों को बताई. जल्द ही इस चमत्कारी गुफा की बात दूर दूर तक फैलने लगी. फिर इस घटना के करीब तीन साल बाद अमरनाथ की पहली यात्रा स्टार्ट हुई. बस तभी से आज तक अमरनाथ यात्रा पर जाने का क्रम चला आ रहा हैं. यदि बूटा के वंशजो की बात करे तो वो आज भी बाबा बर्फानी की गुफा और शिवलिंग को देखने आते रहते हैं.

इस घटना के अलावा कुछ और भी ऐसे फेमस मुस्लिम रहे हैं जो अमरनाथ यात्रा कर चुके हैं. मसलन जैनुल आबीदीन (1420-1470) नाम का एक मुस्लिम शासक अमरनाथ गुफा की यात्रा कर चुका हैं. जैनुल उस समय नदी के दूसरी ओर एक कैनाल का निर्माण कर रहा था. इस बात का जिक्र संस्कृत ग्रंथ राजतरंगिणी में भी किया गया हैं.

 

आपको जान आश्चर्य होगा कि मशहूर मुस्लिम शासक औरंगजेब भी अमरनाथ यात्रा का लुफ्त उठा चुका हैं. फ्रेंच फिजिशियन फ्रांसिस बर्नर की लिखी किताब ‘ट्रैवल्स इन द मुगल एंपायर’ में बताया गया हैं कि कैसे कश्मीर की खुबसूरत वादियों ने औरंगजेब का मन मोह लिया था और इस दौरान वो खुद को अमरनाथ गुफा में जाने से भी नहीं रोक पाया था.

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