क्राइम

मुख्तार अंसारी की अदालत से अरदास, जेल में हो सकता है मेरा मर्डर, बढ़ाई गई सुरक्षा

उत्तर प्रदेश की राजनीति में जब भी बाहुबली नेताओं की गिनती की जाती है उसमें मुख्तार अंसारी का नाम जरूर आता है. मुख्तार अंसारी पर 40 से ज्यादा मुकदमें दर्ज हैं और वह पिछले 14 सालों से जेल में बंद है. मुख्तार यूपी की मऊ विधानसभा सीट से लगातार पांचवीं बार विधायक है. मुख्तार अंसारी की पहचान माफिया डॉन के रूप में भी है.लेकिन अब इसी डॉन को डर सता रहा है, कत्ल होने का डर.

दरअसल यूपी की बांदा जेल में बंद अंसारी ने अदालत में अर्जी लगाकर सुरक्षा मांगी थी. अंसारी ने स्‍पेशल टास्‍क फोर्स (STF) और कई अन्‍य लोगों पर हत्‍या की साजिश का आरोप लगाया है.अब अदालत ने पुलिस से अंसारी को पर्याप्‍त सुरक्षा मुहैया कराने का आदेश दिया है.

इससे पहले अंसारी के सहयोगी डॉन मुन्‍ना बजरंगी ने भी ऐसी ही आशंका जाहिर की थी. उसकी पत्‍नी ने मीडिया के सामने आकर कहा था कि कुछ अपराधी एसटीएफ के एक अधिकारी के साथ मिलकर मुन्‍ना की हत्‍या की साजिश रच रहे हैं. और फिर पिछले साल जुलाई में बागपत जेल के भीतर उसकी हत्‍या कर दी गई थी.

बता दें कि मुख्तार अंसारी साल 2007 में बसपा में शामिल हुए थे. सपा प्रमुख मायावती ने मुख्तार को रॉबिनहुड के रूप में पेश किया था. मुख्तार बसपा के टिकट पर वाराणसी से 2009 का लोकसभा चुनाव लड़ा मगर वह भाजपा के मुरली मनोहर जोशी से हार गए थे. साल 2010 में मुख्तार और उसके भाई अफजल अंसारी को बसपा से निष्कासित कर दिया गया.

इसके बाद तीनों अंसारी भाइयों मुख्तार, अफजल और सिब्गतुल्लाह ने साल 2010 में ‘कौमी एकता दल’ नाम से राजनीतिक पार्टी का गठन किया. 2014 के लोकसभा चुनाव में मुख्तार ने घोसी के साथ-साथ वाराणसी से नरेंद्र मोदी के खिलाफ खड़े होने की घोषणा की थी. लेकिन चुनाव के पहले उन्होंने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली.

फिलहाल वो परिवार के साथ दोबारा बसपा में हैं. उनके भाई अफजाल अंसारी को मायावती ने गाजीपुर से केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा के खिलाफ लोकसभा चुनाव में उतारा है.

Back to top button