2 साल में 7 राज्य..आगे बिहार और बंगाल..ऐसे तो फिर मिलेगी करारी हार !

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दिल्ली विधानसभा में बुरी तरह हार के बाद अब भाजपा अपनी ही बनाई लहर में बहती नजर आ रही है। 2018 में राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ से शुरू हुई हार देश की राजधानी दिल्ली तक बनी रही। यानी दिसंबर 2018 से फरवरी 2020 तक देश के 7 राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए और इन सातों राज्यों में भाजपा की मोदी लहर काम नहीं आई। सीधे शब्दों में 2 सालों में सात राज्य भाजपा के हाथ से निकल गया है।

राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश से सत्ता भाजपा के हाथ से निकल गई। इसके बाद महाराष्ट्र की सत्ता से बेदखल हुई। हरियाणा और झारखंड भी हाथ से गए। यही नहीं 21 साल बाद दिल्ली में प्रचंड बहुमत से सरकार बनाने का सपना देख रही भाजपा का यह दावा भी इसी लहर के हाथों बहता नजर आया। जबकि वन मैन आर्मी बन चुकी भाजपा ने 2014 से अब तक के सभी चुनाव एक ही चेहरे पर लड़े हैं, वो है पीएम नरेंद्र मोदी का चेहरा।

जिस भी राज्य में चुनाव हुई कहीं भी भाजपा ने मुख्यमंत्री के चेहरे या नाम पर चुनाव नहीं लड़ा। पीएम मोदी का चेहरा, उनका नाम, उनकी रैली, इसी पर पूरी तरह भाजपा आश्रित सी हो गई। लेकिन अब यह चेहरा फीका दिखाई देने लगा है। लहर उल्टे भाजपा को ही डुबोने में लगी है।

आने वाले महीनों में बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं, जहां अभी नीतिश कुमार के साथ भाजपा की साझा सरकार है। नीतिश कुमार के ही कई मंत्री और कार्यकर्ता केंद्र सरकार के सीएए, एनआरसी का विरोध करते नजर आए। इन पर नीतिश सरकार ने कार्रवाई की हो, लेकिन अब अगली कार्रवाई नीतिश और भाजपा की साझेदारी पर होने का पूरा अंदेशा है। बिहार के बाद पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं। जहां पहले ही तृणमूल कांग्रेस की मुखिया और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भाजपा से बराबर की टक्कर ले रही हैं। लोकसभा चुनावों में यहां भाजपा का पहले के सालों से भले ही अच्छा प्रदर्शन रहा हो, लेकिन ममता ने इससे सीख जरूर ली है।

ममता बनर्जी लगातार जनता के बीच जा रही हैं। सीएए और एनआरसी पर वो बिना कांग्रेस और बिना कम्युनिस्टों को साथ लिए अकेले ही भाजपा को चुनौती दे रही हैं। इससे पहले लोकसभा चुनावों में बंगाल में हुए बवालों में ममता बनर्जी ने सबूतों के साथ भाजपा पर हमला जारी रखा। दिल्ली विधानसभा की फिर से बात करें तो यहां पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने व्यक्तिवाद की बजाय साम्यवाद की बात की, ऐसी ही छवि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की है। जो सादगी के साथ जनता के बीच, उनके मुद्दों के साथ नजर आती हैं।

तो सात राज्य हाथ से जाने के बाद इस साल इन दो राज्यों में भी भाजपा अपनी पुरानी लहर या वन मैन आर्मी के साथ आती है, तो पूरा संदेह है, कि वो यहां जीत पाए। बहरहाल जनता ने जता दिया है कि लहर से, करंट से उनका लेना—देना नहीं है। उन्हें वादे और इरादे जमीनी हकीकत के तौर पर चाहिए। उन्हें उनकी मूलभूत सुविधाएं पर्याप्त चाहिए। यहां व्यक्तिवाद नहीं चलेगा, यह साफ हो चुका है। कुल मिलाकर यहां वन मैन शो फ्लॉप हुआ है। देखना होगा कि अब इस लहर में भाजपा खुद को पार लगा पाएगी या नहीं।