हिंदू शास्त्रों में चार प्रकार के होते हैं पुरुष हर एक में होती है यह अलग बात

हिन्दू शास्त्रों के मुताबिक, पुरुषों के चार प्रकार होते हैं। शायद आपने इससे पहले ऐसा कुछ न सुना हो। लेकिन आपको बता दें कि हिन्दू शास्त्रों के अलावा खुद महात्मा बुद्ध ने भी पुरुषों को 4 श्रेणियों में विभाजित किया है। इस बात का पता वैसे तो बहुत कम लोगों को है। लेकिन, दुनिया की समस्त पुरुष जाति को उनकी निशानी, पहचान और विशेषताओं के अनुसार 4 श्रेणियों में बांटा गया है। तो आइये आपको बताते हैं कि हिन्दू शास्त्रों के मुताबिक पुरुषों के प्रकार क्या क्या हैं। इस तरह आप भी जान सकते हैं कि आप कौन सी श्रेणी में आते हैं। तो आइये हम बताते हैं कि चार प्रकार के पुरुषों के बारे में….

महात्मा बुद्ध के अनुसार 4 तरह के होते हैं पुरुष

हिन्दू शास्त्रों के मुताबिक पुरुषों के प्रकार बताने से पहले आपको बता देते हैं कि महात्मा बुद्ध के अनुसार पुरुषों के प्रकार क्या क्या हैं। एक बार महात्मा बुद्ध ने अपने प्रवचन के दौरान चार प्रकार के मनुष्यों की बात कही। उन्होंने बताया “मनुष्य चार प्रकार के होते हैं –पहला तिमिर (अंधकार) से तिमिर की ओर जाने वाला यानि ऐसा पुरुष जो अंधकार से अंधकार की ओर जाता है। दूसरा पुरुष वो होता है जो अंधकार से रोशनी की ओर जाता है। तीसरा पुरुष वो होता है जो ज्योति यानि प्रकाश से तिमिर की ओर जाता है यानि प्रकाश से अंधेरे की ओर जाता है। चौथा पुरुष वो होता है जो ज्योति से ज्योति की ओर जाता है।”

पहले प्रकार का पुरुष

हिन्दू शास्त्रों के मुताबिक पुरुषों के प्रकार भी 4 ही हैं जो महात्मा बुद्ध से मिलते हैं। हिन्दू शास्त्रों के मुताबिक पुरुषों के प्रकार में पहला पुरुष वो होता है जो अपना पूरा जीवन बुरे कर्मों को करते-करते ही बिताता है। ऐसा पुरुष तिमिर से तिमिर की ओर जाता है। यानि ऐसा पुरुष गलत काम करते ही जाता है और अंत में मृत्यु को प्राप्त होता है।

दूसरे प्रकार का पुरुष

हिन्दू शास्त्रों के मुताबिक पुरुषों के प्रकार में दूसरा पुरुष वो होता है जो अंधकार से प्रकाश की तरफ जाता है। इसका मतलब ऐसे पुरुष से है जो गलत कर्मो को छोड़कर अच्छे कर्मों को अपनाता है। वह खुद को बदलता है।

तीसरे प्रकार का पुरुष

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तीसरे प्रकार का पुरुष वो व्यक्ति होता है जो प्रकाश से अंधकार की ओर जाता है। यानि एक ऐसा व्यक्ति जो पहले अच्छे कर्म करे और बाद में किसी कारण वश गलत काम करने लगे। ऐसे व्यक्ती की अच्छाई समाप्त हो जाती हैं और उसपर बुराईयां हावी हो जाती हैं।

चौथे प्रकार का पुरुष

चौथा पुरुष वो होता है जो ज्योति से ज्योति की ओर जाता है। यानि ऐसा पुरुष जो प्रकाश से निकलता है और प्रकाश की ओर ही जाता है। हिन्दू शास्त्रों के मुताबिक इस प्रकार का पुरुष अपने आजीवन अच्छे कर्म करता रहता है। यानि ऐसा पुरुष अच्छे कर्मों से अपने जीवन की शुरुआत करता है और अच्छे कर्म करते हुए ही मृत्यु को प्राप्त होता है।