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बीजेपी जब अकेले ला रही महाराष्ट्र में बहुमत, तो क्यों है शिवसेना की जरूरत ?

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा कभी भी हो सकती है. परंतु भाजपा और शिवसेना के बीच गठबंधन की तस्वीर अभी साफ नहीं है. आक्रामक राजनीति करने वाली शिवसेना आधी सीटें लेने की जिद दिखा रही है तो बड़े भाई की भूमिका में आ चुकी भाजपा की कोशिश शिवसेना को कम सीटों पर समेटने की है. इधर भाजपा अंदरूनी सर्वे की रिपोर्ट आने के बाद उत्साह से भर गई है.

सूत्र बताते हैं कि शिवसेना और भाजपा के बीच सीट बंटवारे पर बातचीत अंतिम चरण में है. सूत्रों की मानें तो राज्य की कुल 288 विधानसभा सीटों में से शिवसेना को 120 से 125 सीटें मिल सकती है. हालांकि अभी इसकी औपचारिक घोषणा की प्रतीक्षा है.

जानकारी के मुताबिक लोकसभा चुनाव में मिली शानदार कामयाबी से पहले से उत्साहित पार्टी को अंदरूनी सर्वे की रिपोर्ट ने भी जोश से भर दिया है. बकौल सूत्र चुनाव वाले तीनों राज्यों की सर्वे रिपोर्ट बताती है कि महाराष्ट्र और हरियाणा में पार्टी अकेले दम पर बहुमत हासिल करने की स्थिति में है तो झारखंड में मुकाबला कड़ा हो सकता है.

हरियाणा में कई खेमें में बंटे विपक्ष के चलते भाजपा की जीत तय मानी जा रही है तो वहीं महाराष्ट्र में कांग्रेस और राकांपा की खस्ताहाल स्थिति और उनके गिरे मनोबल ने भाजपा की उम्मीदें बढ़ा दी है. झारखंड में जरूर मुकाबला थोड़ा कड़ा दिख रहा है. चूंकि झारखंड में बाद में चुनाव होने हैं, लिहाजा भाजपा को उम्मीद है कि दो राज्यों के चुनाव नतीजों का सकारात्मक असर झारखंड में भी दिखेगा.

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि महाराष्ट्र में पार्टी अकेले दम पर बहुमत पाने के लक्ष्य के साथ चल रही है. उसकी रणनीति है कि इतनी सीटों पर चुनाव लड़ो कि अपने दम पर बहुमत हासिल हो जाए. भाजपा इस बार बैशाखी के सहारे सरकार चलाना नहीं चाहती. सूत्र बताते हैं कि भाजपा ने अपने छोटे सहयोगी दलों के चुनाव चिन्ह पर भी अपने नेताओं को चुनाव लड़ाने की रणनीति बनाई है ताकि भविष्य में उनका समर्थन मिल सके.

 

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