महादेव और देवी पार्वती से छीनकर बद्रीनाथ को अपना धाम बनाए भगवान विष्णु, जानिये क्यों ?

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देहरादून: हिंदू धर्म में कई ऐसी मान्यताएँ और कहानियाँ हैं, जिनके बारे में आज भी बहुत काम लोग जानते हैं। हिंदू धर्म के प्रमुख देवता त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश के बारे में किसी को कुछ बताने की ज़रूरत नहीं है। इनमें से भगवान शिव और विष्णु को मानने वालों में समय-समय पर टकराव भी होता रहा है। भारत में कई प्राचीन धार्मिक स्थल हैं, जहाँ हर रोज़ हज़ारों की संख्या में भक्त जाते हैं और अपने मन की मनोकामना माँगते हैं।

शेषनाग की शैया पर लेते हुए कर रहे थे विष्णु जी विश्राम:

इन्ही में से एक सबसे चर्चित स्थान है उत्तराखंड में स्थित अलकनंदा नदी के किनारे बसा हुआ बद्रीनाथ धाम। इसे बद्रीनारायण मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें यहाँ पर किसी और की नहीं बल्कि भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार एक बार भगवान विष्णु काफ़ी लम्बे समय से शेषनाग की शैया पर लेटे हुए थे। नारद जी भी उधर से ही गुज़र रहे थे, उन्होंने भगवान विष्णु को जगा दिया। इसके बाद नारद जी ने उन्हें प्रणाम किया और कहा कि प्रभु आप काफ़ी समय से विश्राम कर रहे हैं।

 

इससे लोग आपको आलसी समझेंगे और आलस के उदाहरण के रूप में आपका नाम लेंगे। यह उचित बात नहीं है। नारद जी की बात भगवान विष्णु को सही लगी और उन्होंने नारद जी की बात सुनकर शेषनाग की शैया छोड़ दी और तपस्या के लिए किसी शांत स्थान की तलाश करने लगे। इसी प्रयास में वो हिमालय की तरफ़ चल पड़े। जब वो हिमालय की तरफ़ जा रहे थे तभी अचानक उनकी दृष्टि पहाड़ों पर बने हुए बद्रीनाथ पर पड़ी। विष्णु जी ने सोचा कि हो ना हो यह तपस्या के लिए सबसे अच्छी जगह है। जब विष्णु जी वहाँ पहुँचे तो उन्होंने देखा कि वहाँ पहले से ही एक कुटिया में भगवान शिव और पार्वती विराजमान थे।

विष्णु जी यह देखकर दुविधा में पड़ गए। उन्होंने सोचा कि अगर वह यह तपस्या करते हैं तो शिव जी क्रोधित हो जाएँगे। इसलिए उन्होंने उस स्थान पर क़ब्ज़ ज़माने के लिए एक उपाय सोचा। उन्होंने एक शिशु का वेश धारण किया और बद्रीनाथ के दरवाज़े पर रोने लगे। बच्चे को रोता हुआ देखकर माता पार्वती का हृदय पिघल गया और वह बच्चे को गोद में उठाने के लिए तुरंत भागी। भगवान शिव ने उन्हें ऐसा करने से मना किया लेकिन उन्होंने एक ना सुनी। माता पार्वती ने कहा कि आप कितने निर्दयी हैं, एक बच्चे को रोता हुआ कैसे देख सकते हैं आप?

शिव और पार्वती ने केदारनाथ को बनाया अपना धाम:

पार्वती जी ने बच्चे को गोद में उठाया और घर के अंदर आ गयी। बच्चे को दूध पिलाकर उन्होंने उसे चुप करवाया। जब बच्चे को नींद आने लगी तो उसे घर में सुलाकर दोनो पास स्थित कुंड में स्नान करने चले गए। जब वो दोनो स्नान करके वापस आए तो देखा कि कुटिया का दरवाज़ा अंदर से बंद है। पार्वती जी उस बच्चे को जागने की कोशिश करती रहीं लेकिन द्वार नहीं खुला। उसके बाद शिव जी ने कहा कि अब उनके पास दो ही रास्ते हैं, पहला तो वह यहाँ की हर चीज़ को जला दें या फिर यहाँ से कहीं और चले जाएँ। माता पार्वती को बच्चा बहुत पसंद था और वह अंदर सो रहा था, इसलिए शिव जी इसे जला नहीं सकते थे। इसके बाद दोनो वहाँ से चले गए और केदारनाथ को अपना नया धाम बनाया। उसके बाद से ही वह स्थान बद्रीनाथ धाम के रूप में विष्णु जी का हो गया।